कोलकाता में बागेश्वर धाम के प्रमुख पुजारी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तस्वीर कथित तौर पर जलाने के मामले में पश्चिम बंगाल कांग्रेस के महासचिव आशुतोष चटर्जी रविवार को भवानीपुर पुलिस थाने पहुंचे। पुलिस ने उन्हें मामले की जांच के लिए नोटिस देकर बुलाया था। यह विवाद दुर्गा पूजा के दौरान बंगालियों के मांसाहार को लेकर शास्त्री की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था। अब इस मामले ने कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव का रूप ले लिया है।
चटर्जी ने बताया कि भवानीपुर पुलिस थाने की ओर से उन्हें रविवार सुबह करीब 10 बजे नोटिस दिया गया था। इसमें उन्हें दोपहर तीन बजे मामले के जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। इसके बाद वह तय समय पर थाने पहुंचे। पुलिस की कार्रवाई उस निर्देश के बाद तेज हुई, जिसमें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 10 सितंबर को शास्त्री की तस्वीर जलाने में शामिल लोगों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस से कहा था। उन्होंने कहा था कि इस तरह की गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
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पुलिस थाने से बाहर निकलने के बाद चटर्जी ने कार्रवाई को ‘बदले की राजनीति’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इशारे पर काम कर रही है और उन लोगों को परेशान किया जा रहा है, जो बागेश्वर बाबा जैसे स्वयंभू धर्मगुरुओं की टिप्पणियों का विरोध कर रहे हैं। चटर्जी ने कहा कि बंगालियों को उनके पारंपरिक खान-पान, जीवनशैली और रीति-रिवाज छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताया और कहा कि वह कानून का पालन करेंगे।
चटर्जी के पुलिस थाने से बाहर निकलते समय कांग्रेस और भाजपा के युवा मोर्चा के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाए। भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पर हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार जैसे मुद्दों को नहीं उठाने का आरोप लगाया। वहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा पर ऐसे स्वयंभू धर्मगुरुओं का साथ देने का आरोप लगाया, जिनकी टिप्पणियों से बंगाली हिंदुओं की भावनाएं आहत होती हैं। इस टकराव ने साफ कर दिया कि मामला अब केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है।