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Badlapur Accused Encounter: सीआईडी ने SIT प्रमुख को नहीं सौंपे कागजात, नाराज हाईकोर्ट ने दी अवमानना की चेतावनी

Fri, 25 Apr 2025 05:54 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

इस मामले में कोर्ट ने कहा कि यह उनके आदेश की खुली अवहेलना है। अगर इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो लोगों का कानून पर से भरोसा उठ जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा- हम आदेश पास करते हैं लेकिन सरकार कुछ नहीं करती तो इससे क्या संदेश जाएगा? यह तो कानून के शासन को कमजोर करने वाला है।
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बॉम्बे हाई कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि उसके साफ-साफ आदेश के बावजूद पुलिसवालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं करना बहुत गंभीर मामला है। कोर्ट ने कहा कि इससे समाज में गलत संदेश जा रहा है और कानून का शासन कमजोर हो रहा है। यह मामला बदलापुर स्कूल यौन शोषण केस में आरोपी अक्षय शिंदे की मौत से जुड़ा है। अक्षय शिंदे की 23 सितंबर 2024 को पुलिस कस्टडी में गोली लगने से मौत हो गई थी। पुलिस ने दावा किया था कि उसने एक पुलिसवाले की बंदूक छीन ली थी और आत्मरक्षा में उसे गोली मारी गई, लेकिन उसके परिवार ने आरोप लगाया कि यह फर्जी एनकाउंटर था।
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बॉम्बे हाईकोर्ट का सख्त रुख
7 अप्रैल को हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि इस मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाई जाए और जांच की जिम्मेदारी ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (क्राइम) लक्ष्मी गौतम को दी जाए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि महाराष्ट्र की सीआईडी को दो दिनों के भीतर जांच से जुड़े सभी दस्तावेज लक्ष्मी गौतम को सौंपने चाहिए। लेकिन शुक्रवार को सुनवाई के दौरान पता चला कि अब तक कागजात ट्रांसफर नहीं हुए हैं। इस पर कोर्ट ने सीआईडी अफसरों को फटकार लगाई और अवमानना की चेतावनी दी।
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सीआईडी अफसर कोर्ट के सामने पेश
इस मामले में सीआईडी प्रमुख और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशांत बुरड़े वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कोर्ट में पेश हुए और भरोसा दिलाया कि सभी दस्तावेज आज शाम तक एसाईटी प्रमुख को सौंप दिए जाएंगे। कोर्ट ने यह बयान स्वीकार किया और कहा कि अब सीआईडी के एसपी प्रशांत वानगुडे को यह काम करना होगा। लक्ष्मी गौतम ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने एसआईडी का गठन कर लिया है, जैसा कि कोर्ट ने आदेश दिया था।

एफआईआर न होने पर सवाल
हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि ललिता कुमारी केस में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अगर कोई अपराध प्रथम दृष्टया दिख रहा हो, तो एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होता है। ऐसे में 7 अप्रैल के आदेश के बाद तुरंत एफआईआर हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। सरकार ने बताया कि उन्होंने 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है और उस पर 5 मई को सुनवाई है। लेकिन हाईकोर्ट ने साफ कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर रोक नहीं लगाई है, तब तक सरकार को उसका पालन करना होगा।

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हाईकोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट ने हमारे आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है। इसका मतलब है कि आपको आदेश मानना होगा। अगर आप सहमत नहीं थे तो तुरंत सुप्रीम कोर्ट से स्टे लेते, लेकिन आपने फाइलें दबाकर रखीं। एफआईआर अब तक क्यों नहीं हुई? यह सीधे अवमानना का मामला है। इस मामले में मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि यह फर्जी एनकाउंटर हो सकता है और पांच पुलिसवाले जिम्मेदार हैं।
  • सीनियर इंस्पेक्टर संजय शिंदे, ठाणे क्राइम ब्रांच  
  • असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर निलेश मोरे
  • हेड कांस्टेबल अभिजीत मोरे
  • हेड कांस्टेबल हरीश तावड़े
  • पुलिस ड्राइवर सतीश खाताल

मृतक के परिवार की याचिका
अक्षय शिंदे के माता-पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी और स्वतंत्र जांच की मांग की थी। उनकी बात को मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट ने भी सही ठहराया और कहा कि फर्जी एनकाउंटर की बात में दम है।
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