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बैड लोन संकटः 12 महीनों में 56.4 फीसद बढ़ा बैंकों का एनपीए

Mon, 20 Feb 2017 12:33 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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लगाातार बढ़ रहा एनपीए देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट बनता दिख रहा है। पिछले 12 महीनों के दौरान सरकारी बैंकों के एनपीए में 56.4 फीसद का इजाफा हुआ है और यह 6,14,872 करोड़ रुपये हो गया है। यही नहीं, अगले दो क्वार्टर में इसके और बढ़ने की आशंका है, क्योंकि नोटबंदी की मार के बाद छोटे और मध्यम सेक्टर की औद्योगिक इकाइयां अपनी किश्तों का भुगतान नहीं कर पाई हैं। 
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पिछले दो सालों में 2,61,843 करोड़ रुपये एनपीए में 135 प्रतिशत बढ़ा है। बावजूद इसके कि भारतीय रिजर्व बैंक ने पुर्ननिर्धारित करने के लिए योजनाओं की घोषणा की है। बैड लोन पीएसयू बैंकों की सकल अग्रिमों का 11 प्रतिशत हो गया है, जबकि सरकारी और प्राइवेट बैंकों को मिलाकर कुल एनपीए दिसबंर 2016 तक 6,97,409 करोड़ रुपये हो गया। ये आंकड़े केयर रेटिंग्स ने इंडियन एक्सप्रेस के लिए इकट्ठा किए हैं।

कम से कम पांच बैंकों ने कुल एनपीए अनुपात (बैड लोन और कुल लोन का अनुपात) को जारी किया है। इंडियन ओवरसीज बैंक का एनपीए अनुपात 22.42 प्रतिशत हैं। इसका मतलब है ये है कि लोन लिए गए 100 रुपये में से 22.42 रुपया बैंक की ओर से बैड लोन के रूप में दर्ज किया गया है। 
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