पूर्वोत्तर भारत में कांग्रेस का समय शायद खराब चल रहा है। पहले बीते महीने हुए विधानसभा चुनाव में असम की सत्ता उसके हाथों से निकली और इसके बाद मेघालय कांग्रेस में बगावत के सुर तेज हो गए। अब त्रिपुरा कांग्रेस में बगावत शुरू हो गई है। त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री समीर रंजन बर्मन की अगुवाई में पार्टी के छह विधायकों ने रमजान के बाद तृणमूल कांग्रेस का दामन थामने का फैसला किया है। इनमें समीर रंजन के पुत्र सुदीप राय बर्मन भी शामिल हैं।
सुदीप का कहना है कि हम लोग ममता बनर्जी के नेतृत्व में अगला विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। दरअसल, यह बगावत पश्चिम बंगाल में माकपा के साथ चुनावी तालमेल की वजह से उपजे असंतोष का नतीजा है। सुदीप के मुताबिक इससे त्रिपुरा में कांग्रेस की बची-खुची साख भी खत्म हो गई है। इन विधायकों की बगावत से एक दिन पहले राजधानी अगरतला में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव मुकुल राय ने बागी विधायकों के साथ एक गोपनीय बैठक की थी।
त्रिपुरा में मानिक सरकार की अगुवाई वाली वाममोर्चा सरकार सत्ता में है। कांग्रेस यहां प्रमुख विपक्षी पार्टी है, लेकिन बागियों की दलील है कि वाममोर्चा से हाथ मिलाकर पार्टी नेतृत्व ने यहां कांग्रेस का सत्यानाश कर दिया है। इस बगावत के लिए कांग्रेस आलाकमान ने सुदीप राय बर्मन को निलंबित कर दिया है। सुदीप ने प्रदेश कांग्रेस की हालत पर पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी को एक पत्र भी भेजा था। त्रिपुरा माकपा में भी बंगाल में हुए चुनावी तालमेल के प्रति असंतोष है। प्रदेश माकपा सचिव बिजन धर कहते हैं कि पार्टी ने अतीत में कई गलतियां की हैं, लेकिन बंगाल में कांग्रेस से हाथ मिलाना उसकी सबसे बड़ी भूल थी।