हिंदू पक्षकारों ने इस्लामिक कानून का हवाला देकर कहा है कि विवादित जगह पर स्थित मस्जिद को कतई वैध नहीं ठहराया जा सकता। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में पक्षकारों के वकील ने कहा, बाबर आक्रांता था इसलिए उसके कार्यों को न्यायसंगत नहीं कह सकते।
जैन ने संविधान पीठ के समक्ष कहा, 1770 तक मुस्लिम इतिहासकारों ने भी मस्जिद का जिक्र नहीं किया। 1877-78 के राजपत्र में यह जिक्र किया गया कि हिंदुओं ने जन्मस्थान को फिर से हासिल कर लिया। अंग्रेजों ने विवादित स्थल पर रेलिंग लगाई जिसके बाद विवाद शुरू हुआ। 1855 से हिंदुओं के अधिकारों पर पाबंदी लगी। ब्रिटिश काल में पूजा के अधिकार को कम कर दिया गया।
बकौल जैन, यह भी कहा जा रहा है कि विवादित स्थल पर मुस्लिम नमाज पढ़ने जाते थे लेकिन वहां नमाज के लिए जाना कोई मायने नहीं रखता, क्योंकि वह हिंदू मंदिर था। जैन ने सवाल दागते हुए कहा कि अगर हवाईअड्डे पर भी नमाज के लिए जगह होती तो क्या वह उस जगह पर कब्जे का दावा कर सकते हैं?
उधर, शिया वक्फ बोर्ड ने पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि 1936 तक विवादित जगह उनके कब्जे में भी थी लेकिन किसी ने चुनौती नहीं दी। 1936 के एक्ट के बाद शिया वक्फ और सुन्नी वक्फ के बीच विवाद शुरू हुआ।