बेलडांगा में निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद का शिलान्यास किए जाने पर देश की राजनीति गरमा गई है। भाजपा ने इस कदम को आपत्तिजनक बताया और इसे इतिहास के जख्म कुरेदने वाली कार्रवाई कहा। वहीं टीएमसी और कांग्रेस भी अपने-अपने राजनीतिक आरोपों के साथ मैदान में उतर आए हैं। इस विवाद ने बंगाल की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है।
हुमायूं कबीर ने बेलडांगा में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास किया, जिसके बाद भाजपा राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने तीखी प्रतिक्रिया दी। चुघ ने कहा कि बाबर ने भारत की संस्कृति को मिटाने की कोशिश की थी, नदियों को खून से लाल किया और मंदिर तोड़े। उन्होंने कहा कि देश बाबर के नाम पर किसी भी स्मारक को स्वीकार नहीं करेगा।
यह ममता की राजनीति का नतीजा- भाजपा
दिल्ली में केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने टीएमसी पर सीधे वार किए। उन्होंने कहा कि यह सब ममता बनर्जी की 15 साल की तुष्टिकरण राजनीति का नतीजा है। मजूमदार ने दावा किया कि हुमायूं कबीर को पुलिस का पूरा सहयोग मिला हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी वास्तव में बाबरी मस्जिद निर्माण नहीं चाहतीं, तो वह कबीर को गिरफ्तार करतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता ने सिर्फ दिखावे के लिए कबीर को निलंबित किया है, ताकि हिंदुओं को धोखा दिया जा सके।
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डर और नफरत की राजनीति- कांग्रेस
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुवंकर सरकार ने भाजपा पर 1992 का माहौल याद दिलाते हुए हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा ने देश में डर और आतंक का माहौल बनाया था, जिसने इतिहास पर धब्बा छोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी हिंदू-मुस्लिम एकता को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने कहा कि राज्य और केंद्र दोनों सरकारें चुनाव से पहले मंदिर-मस्जिद की राजनीति करके लोगों को बांट रही हैं।
चुनावी माहौल में बढ़ी गर्मी
कांग्रेस ने कहा कि न तो राज्य सरकार और न केंद्र सरकार जनता की असल जरूरतों पर बात कर रही है। न स्कूल, न अस्पताल, न फैक्ट्री बंगाल के बेरोजगारों के लिए कोई योजना नहीं बन रही। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद और राम मंदिर जैसे मुद्दों को चुनावी हथियार बनाया जा रहा है, जबकि विकास पूरी तरह गायब है। इससे बंगाल की राजनीति और ज्यादा ध्रुवीकृत हो रही है।
तीनों दलों के बयान इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा बनेगा। भाजपा टीएमसी को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ने वाली है, वहीं टीएमसी और कांग्रेस भाजपा पर धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप लगा रही हैं। बाबरी मस्जिद का शिलान्यास अब बंगाल की राजनीति में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है और इसका असर आने वाले चुनावों में साफ दिखाई देगा।
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