पूर्व मंत्री और एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में महाराष्ट्र की एक विशेष मकोका अदालत ने सुनवाई की। इस दौरान न्यायाधीश महेश जाधव ने मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी अखिलेंद्र प्रताप सिंह और आकाशदीप सिंह ने जमानत की मांग करते हुए दावा किया था कि मकोका को सही ठहराने के लिए उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
दोनों आरोपियों ने याचिका में क्या दावा किया
मामले में आरोपी अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने इस आधार पर ज़मानत मांगी थी कि उनके खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) बिना सोचे-समझे लागू किया गया था। उनकी याचिका में कहा गया था कि मकोका को सही ठहराने के लिए उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
वहीं, दूसरे आरोपी आकाशदीप सिंह ने दावा किया था कि चार्जशीट में उनके खिलाफ कोई भी आपत्तिजनक सामग्री नहीं दी गई है। अपनी याचिका में आकाशदीप सिंह ने कहा था कि उन पर वांछित आरोपियों द्वारा संचालित एक संगठित अपराधिक गिरोह का सदस्य होने का आरोप लगाया गया है, लेकिन उनके द्वारा अंजाम दिए गए किसी मामले का जिक्र नहीं किया गया है।
अभियोजन पक्ष ने दी ये दलील
मामले में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के साथ-साथ सिद्दीकी परिवार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रदीप घरात और त्रिवणकुमार करनानी ने दोनों की जमानत याचिकाओं का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपपत्र में दी गई सामग्री आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करती है।
बता दें कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता सिद्दीकी (66) की 12 अक्टूबर, 2024 की रात मुंबई के बांद्रा (पूर्व) इलाके में उनके बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर तीन हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में 26 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भाई अनमोल बिश्नोई और दो अन्य फरार आरोपी हैं।