क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री इंडिया (CTRI) से अनुमति के बाद पतंजलि ने इंदौर के मरीजों पर पतंजलि के दवाओं के क्लीनिकल परीक्षण की अनुमति मांगी थी, लेकिन जिलाधिकारी मनीष सिंह ने अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
इसके पूर्व मध्यप्रदेश के एक विधायक प्रवीण पाठक ने पतंजलि की दवाओं को क्लीनिकल ट्रायल दिए जाने का यह कहते हुए विरोध किया था कि इंदौर में कोरोना की स्थिति विस्फोटक होती जा रही है, लेकिन राज्य सरकार बिना प्रमाणिक दवाओं के परीक्षण की अनुमति देकर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रही है। अपना विरोध जताते हुए विधायक ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले पर संज्ञान लेने का भी अनुरोध किया था।
वहीं, आयुष मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि पतंजलि की दवाएं अभी परीक्षण के दौर में हैं। आधुनिक चिकित्सकीय मापदंडों पर पूरी तरह से खरा उतरने पर ही उसे कोरोना की औषधि होने का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इसके लिए पर्याप्त चिकित्सकीय परिणाम के आंकड़ों और परीक्षणों की आवश्यकता होगी। इसके लिए एक प्रक्रिया का पालन किया जाता है।