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B'DAY SPECIAL: कभी पिता के साथ बेची चाय, आज हैं देश के प्रधानमंत्री

Sat, 16 Sep 2017 01:17 PM IST
amarujala.com, Presented by: अभिषेक तिवारी
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नरेंद्र दामोदार दास मोदी बचपन से ही अपने हर काम को लेकर ढृढ़ निश्चयी रहे हैं। उनके काम करने का अंदाज भी दूसरे लोगों से अलग रहा है। ऐसा नहीं है कि उन्होंने आम बच्चों की तरह कोई शरारत नहीं की पर वो कम उम्र से ही जिंदगी के हर छोटे बड़े हालातों को समझने लगे थे। आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। 67 वर्षीय मोदी ने अपने जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव देखें। आइए उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ ऐसे किस्से-कहानियों को आपको बतातें है जिनके बारे में शायद आपने पहले नहीं सुना होगा।
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नरेंद्र मोदी ने पिता के साथ बेची चाय गुजरात के वडनगर में नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ था। नरेंद्र मोदी 5 भाई-बहन है जिसमें वो तीसरे स्थान पर हैं। वडनगर रेलवे स्टेशन पर नरेंद्र मोदी के पिता चाय बेचने का काम करते थे। नरेंद्र मोदी स्कूल के बाद सीधा पिता की दूकान पर पहुंच जाते और ग्राहकों को चाय देते थे। उन्होंने रेल के डिब्बों में घूम कर भी चाय बेची है।
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जब एक पक्षी के लिए खंबे पर चढ़ गए मोदी

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स्कूली दिनों में नरेंद्र मोदी एनसीसी कैंप में गए जहां से बाहर निकलना मना था। स्कूल के शिक्षक गोवर्धनभाई पटेल ने देखा कि मोदी एक खंबे पर चढ़े हुए हैं तो उन्हें गुस्सा आ गया लेकिन जब उनकी नजर इस बात पर पड़ी कि एक फंसे हुए पक्षी को निकालने के लिए नरेंद्र खंबे पर चढ़े हैं तो उनका गुस्सा खत्म हो गया।

नरेंद्र मोदी और बाल गंगाधर तिलक की एक जैसी जन्म कुंडली
ज्योतिष शास्त्र पर विश्वास करने वाले लोगों को ये जानकर खुशी होगी कि नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को सुबह 11 बजे हुआ था। मोदी की कुंडली देखने वाले ज्योतिष के अनुसार उनकी कुंडली में राहू अंतरदश का योग है जिसके चलते कोई भी इंसान राजनीति में श्रेष्ठ माना जाता है। इसे संयोग कहें या ग्रह नक्षत्रों का करिश्मा, मोदी की जन्म कुंडली स्वतंत्र सैनानी बाल गंगाधर तिलक से बिल्कुल मिलती है। इसके अलावा उनकी कुंडली ओट्टो वोन बिसमार्क से भी मिलती है जिन्होंने 1910 में जर्मनी को एक सुपरपावर देश में तब्दील कर दिया था।

मगरमच्छ के बच्चे को पकड़ लाए

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एक बार नरेंद्र मोदी अपने बचपन के दोस्त के साथ शर्मिष्ठा सरोवर गए थे जहां से वो एक मगरमच्छ के बच्चे को पकड़ लाए थे। उनकी मां हीरा बेन ने उनसे कहा कि इसे वापस छोड़कर आओ। बच्चे को कोई यदि मां से अलग कर दे तो दोनों को ही परेशानी होती है। मां की ये बात नरेंद्र को समझ में आ गई और वो तुरंत उस मगरमच्छ के बच्चे को वापस सरोवर में छोड़ आए।

स्कूल की चारदीवारी बनवाई
10 वीं की पढ़ाई के दौरान स्कूल का रजत जयंती वर्ष था। स्कूल में चारदीवारी नहीं थी और स्कूल के पास इतना पैसा भी नहीं था कि चारदीवारी बनवा सके। उनके मन में आया कि छात्रों को भी इस काम में स्कूल की मदद करनी चाहिए। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर नाटक का मंचन किया और इससे जो राशि जमा हुई वो स्कूल की चारदीवारी बनवाने के लिए दे दी।

जूते और पॉलिश खरीदने के नहीं थे पैसे

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नरेंद्र मोदी के घर की आर्थिक हालत बहुत खराब थी। उनके पास जूते खरीदने तक के पैसे नहीं थे। उनके मामा ने उन्हें सफेद कैनवस जूते खरीद कर दिए। अब जूते गंदे होते तो उनके पास पॉलिश खरीदने के लिए भी पैसे नहीं थे। उन्होंने इसके लिए एक तरीका निकाला। टीचर जो चॉक के टुकड़े फेंक देते थे उन्हें वो जमा कर लेते थे और उनका पाउडर बनाकर भिगोकर अपने जूतों पर लगा लिया करते थे। सूखने के बाद जूते नए जैसे ही लगने लगते थे।

17 साल की उम्र में घर छोड़ आश्रम में रहने लगे

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उन्होंने 17 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था। वो राजकोट में रामकृष्ण मिशन आश्रम में गए फिर कोलकाता के पास बेलुड़ मठ में गए। वहां से वह गुवाहाटी, फिर अल्मोड़ा में स्वामी विवेकानंद के बनाए गए आश्रम में रहने लगे।

13 साल की उम्र में नरेंद्र मोदी ने कर ली शादी
मूलचंद और हीराबेन ने अपने घांची समुदाय के परंपराओं को मानते हुए मोदी का रिश्ता 13 साल की उम्र में जसोदाबेन से तय कर दी। वो दोनों कुछ समय तक के लिए साथ रहे और फिर दोनों एक दूसरे के लिए अजनबी जैसे हो गए। गौरतलब है कि गृहस्थ जीवन छोड़ने के बाद वो कई सालों तक हिमालय पर तपस्या करने चले गए थे।

खिचड़ी सबसे पसंदीदा खाना
आपको बता दें कि नरेंद्र मोदी को खाने में भाखरी (तली हुई रोटी) और खिचड़ी खाना बहुत पसंद है। हालांकि ये दोनों व्यंजन गुजराती स्टाइल में बने हुए होने चाहिए। नरेंद्र मोदी बहुत अच्छा खाना भी बनाते हैं।
 
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शहनाई वादकों को भगा देते थे मोदी

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हाल ही में 'मन की बात' में मोदी ने बताया था कि वो शहनाई बजाने वालों को इमली दिखाया करते थे ताकि शहनाई बजाने वालों के मुंह में पानी आ जाए और वो शहनाई ना बजा पाएं। इस पर शहनाईवादक नाराज होकर मोदी के पीछे भी भागते थे। हालांकि उन्होंने कहा कि वो शरारत के साथ पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देते थे। मोदी ने कहा कि उनका मानना है कि शरारतों से ही बच्चे का विकास होता है।
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