पूरा मामला क्या है?
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान आजम खां ने मिलक कोतवाली इलाके के खातानगरिया गांव में जनसभा को संबोधित किया था। इस जनसभा के दौरान उन पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा। आरोप था कि उनके बयान से दो वर्गों में नफरत फैल सकती थी। जिसका वीडियो वायरल हुआ था।
भाषण का वीडियो वायरल होने के बाद वीडियो अवलोकन टीम के प्रभारी अनिल कुमार चौहान ने मिलक कोतवाली में मामला दर्ज कराया। इस मामले में आजम पर आईपीसी की धारा 153-ए, 505-ए और 125 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ। मामले की सुनवाई के बाद एमपी-एमएलए (मजिस्ट्रेट ट्रायल) निशांत मान की कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया। कोर्ट ने आजम को इसके लिए तीन साल की सजा और छह हजार जर्माने की सजा सुनाई।
तो क्या आजम की विधायकी भी जाएगी?
लोक-प्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 8(3) के मुताबिक, अगर किसी नेता को दो साल या इससे ज्यादा की सजा सुनाई जाती है तो उसे सजा होने के दिन से उसकी अवधि पूरी होने के बाद आगे छह वर्षों तक चुनाव लड़ने पर रोक का प्रावधान है। अगर कोई विधायक या सांसद है तो सजा होने पर वह अयोग्य ठहरा दिया जाता है। उसे अपनी विधायकी या सांसदी छोड़नी पड़ती है। आजम को तीन साल की सजा हुई है। ऐसे में उनकी विधायकी जाना लगभग तय है।
क्या हमेशा से ऐसा होता रहा है?
नहीं, 2013 के पहले ऐसा नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में इस अधिनियम को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए धारा 8(4) को असंवैधानिक करार दिया था। इस प्रावधान के मुताबिक, आपराधिक मामले में (दो साल या उससे ज्यादा सजा के प्रावधान वाली धाराओं के तहत) दोषी करार किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को उस सूरत में अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता था, अगर उसकी ओर से ऊपरी न्यायालय में अपील दायर कर दी गई हो। यानी धारा 8(4) दोषी सांसद, विधायक को अदालत के निर्णय के खिलाफ अपील लंबित होने के दौरान पद पर बने रहने की छूट प्रदान करता है। इसके बाद से किसी भी कोर्ट में दोषी ठहराए जाते ही नेता की विधायकी-सासंदी चली जाती है।
पिता आजम खां के साथ अब्दुल्ला आजम
- फोटो : अमर उजाला
आजम पर कुल कितने और कैसे-कैसे मामले दर्ज हैं?
2022 में हुए विधानसभा चुनाव में दिए हलफनामे के मुताबिक आजम, उनकी पत्नी और विधायक बेटे पर कुल 165 आपराधिक मामले दर्ज हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 2017 तक इस परिवार के तीनों सदस्यों में से सिर्फ आजम खान पर एक मुकदमा दर्ज था।
आजम खान, उनके बेटे और पत्नी ने जो हलफनामे दाखिल किए थे, उनके मुताबिक आजम पर कुल 87 मामले, अब्दुल्ला आजम पर 43 और तजीन फातिमा पर 35 मामले दर्ज हैं। तीनों पर मिलाकर कुल 165 केस दर्ज हैं। हालांकि, अब ये संख्या और बढ़ चुकी है। चुनाव प्रचार के दौरान और इसके बाद भी आजम पर दर्ज होने वाले मामलों में इजाफा हुआ। अब ये संख्या 90 को छू चुकी है।
अब तक आजम और उनके परिवार के सदस्य कितने दिन जेल में बिता चुके हैं?
फर्जी पैन कार्ड और पासपोर्ट बनवाने के मामले में 26 फरवरी 2020 को आजम खान, उनकी पत्नी तजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम ने रामपुर की अदालत में आत्मसमर्पण किया था। रामपुर जेल में एक रात गुजारने के बाद तीनों को सीतापुर जेल भेज दिया गया। करीब दस महीने जेल में रहने के बाद 20 दिसंबर 2020 को आजम की पत्नी जमानत पर बाहर आईं। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम करीब 23 महीने जेल में रहने के बाद 16 जनवरी 2022 को रिहा हुए।
आजम खान सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने पर 27 महीने बाद 20 मई 2022 को जेल से रिहा हुए। तब उनके ऊपर दर्ज केसों की संख्या 89 हो चुकी थी। बीते अगस्त में भी उनके ऊपर एक केस दर्ज हुआ। यानी, आजम पर दर्ज मामलों की संख्या 90 पहुंच गई।
परिवार के लोगों पर क्या-क्या आरोप?
परिवार के तीनों सदस्यों पर सबसे ज्यादा मामले 2006 में जौहर यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा करने के हैं। इसी यूनिवर्सिटी के लिए तीनों पर शत्रु संपत्ति की जमीन को जौहर यूनिवर्सिटी में मिलाने और सरकारी जमीन पर कब्जा करने के भी आरोप हैं। आजम परिवार के तीनों सदस्यों पर अब्दुल्ला आजम का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का भी आरोप है।
क्या तीनों पर एक-दूसरे से अलग मामले भी दर्ज?
तजीन पर रामपुर पब्लिक स्कूल के लिए फर्जी फायर एनओसी लगाने और बिजली चोरी का आरोप है। अब्दुल्ला पर चुनाव में झूठी जानकारी देने का आरोप है। अब्दुल्ला आजम और आजम खान पर मदरसे से किताबें चुराने और टोल पर पुलिस के साथ बदसलूकी करने का भी आरोप है।
आजम खां के परिवार के साथ जयंत चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
2017 में आजम पर कौन-सा केस था?
आजम खान के 2017 के हलफनामे के मुताबिक, उस वक्त उन पर सिर्फ एक केस दर्ज था। हलफनामे में आजम ने बताया था कि उन पर चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण देने का मामला चल रहा है। यानी, 2019 में भड़काऊ भाषण देने के मामले में दोषी ठहराए गए आजम पर 2017 में चल रहा इकलौता मामला भी भड़काऊ भाषण देने का ही था।