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आयुष्मान भारत बीमा योजना को पैसों का 'टोटा', खटखटाया जेटली का दरवाजा

Wed, 03 Oct 2018 04:39 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा योजना यानी आयुष्मान भारत के पास पैसे की कमी हो गई है। देश के 50 करोड़ भारतीयों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिकारियों ने वित्त मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया है।

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प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना यानी आयुष्मान भारत को लागू करने का जिम्मा राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी को सौंपा गया है। इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी को शुरुआती बजट के तौर पर 2 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान रखा था। लेकिन बजट खर्च होने के बाद एजेंसी ने साल 2018-19 के शेष वित्त वर्ष के लिए मंत्रालय से अतिरिक्त साढ़े चार हजार रुपए देने की मांग की है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि शुरुआती बजट का अधिकांश हिस्सा योजना को शुरू करने में ही खर्च हो गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि चूंकि यह प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है, और देश के करोड़ों लोग इससे लाभार्थी हैं, अतः योजना को चलाने को लेकर बजट की समस्या उत्पन्न नहीं होगी। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने संशोधित अनुमानित बजट का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा जा चुका है, और अब उनके अप्रूवल का इंतजार है।

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बजट को लेकर सरकार आश्वस्त, कहा- नहीं आएगी कोई दिक्कत

आयुष्मान भारत के सूत्रों का कहना है कि बजट को लेकर यह शुरूआती दिक्कतें हैं और सरकार ने भरोसा दिलाया है कि बजट को लेकर कोई समस्या पेश नहीं आएगी। गौरतलब है कि सरकार ने इस साल वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2018-2019 का बजट पेश करते समय अलग से 4 फीसदी हेल्थ सेस लगाने का ऐलान किया था, जिसमें उन्होंने उम्मीद जताई थी कि अतिरिक्त 11 हजार करोड़ रुपए इसके तहत जमा होंगे।

आयुष्मान भारत योजना से फिलहाल खजाने पर हर साल करीब 5,000 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा। जो कि अगले साल बढ़कर 10,000 करोड़ हो जाएगा। इस साल 8 करोड़ लोग इससे लाभान्वित हो सकते हैं, वहीं 2020 तक 10 करोड़ लोगों तक पहुंचाने का टारगेट रखा गया है।

इस योजना की लॉन्चिंग के बाद से अभी तक देशभर में 13 हजार से ज्यादा लाभार्थी इसका फायदा उठा चुके हैं। जिसके बदले में 25 करोड़ के क्लेम अभी तक जारी किए जा चुके हैं। वहीं इस योजना में अभी तक कर्नाटक समेत 25 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश शामिल हो चुके हैं।
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