फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भाषा विवाद में बोले आयुष सचिव, अंग्रेजी में बोलने के लिए बनाया जा रहा था दबाव

Sun, 23 Aug 2020 09:42 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
केंद्रीय आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

तमिलनाडु में हिंदी को लेकर बेवजह का नया विवाद शुरू हो गया है। दक्षिण भारत के कुछ राजनेताओं ने आयुष मंत्रालय पर आरोप लगाया है कि हिंदी भाषा नहीं बोलने वालों के साथ पक्षपात किया जा रहा है। आरोप है कि केंद्रीय आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने वर्चुअल टेनिंग सत्र में कहा था कि जिन लोगों को हिंदी नहीं आती, वह जा सकते हैं क्योंकि उनकी अंग्रेजी अच्छी नहीं है। 

विज्ञापन


हालांकि, आयुष सचिव कोटेचा ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए बेबुनियाद बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई विवाद हुआ ही नहीं है। आयुष मंत्रालय की ओर से किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि दरअसल बैठक में कुछ लोग बेवजह का हंगामा खड़ा कर रहे थे, जिन्हें म्यूट कर दिया। बाद में इस मुद्दे को भाषाई विवाद का रंग दे दिया गया। 
 

बैठक में आए बिन बुलाए लोग, वीडियो सही नहीं : कोटेचा
द प्रिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार कोटेचा ने इस विवाद को लेकर कहा, 'सभी राज्यों के अधिकारियों के लिए योग के मास्टर प्रशिक्षकों के लिए आधिकारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। मैं अपने संबोधन में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का उपयोग कर रहा था। मैं समान मंचों पर पहले भी हमेशा दोनों भाषाओं का उपयोग करता रहा हूं।'
विज्ञापन


उन्होंने दावा किया, 'बैठक में कुछ बिन बुलाए प्रतिभागियों ने विवाद खड़ा किया जो मुझे लगातार अंग्रेजी में बोलने के लिए परेशान कर रहे थे। जब मैं दोनों भाषाओं में बोल रहा था, ये लोग केवल अंग्रेजी केवल अंग्रेजी के नारे लगाकर कार्यक्रम को बाधित कर रहे थे। मैंने विनम्रतापूर्वक इन लोगों से कहा कि मेरी अंग्रेजी बहुत अच्छी नहीं है लेकिन मैं दोनों भाषाओं में बोलने का प्रयास कर रहा हूं और अगर उन्हें इससे कोई दिक्कत है तो वह जा सकते हैं।'

कोटेचा ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो क्लिप के साथ छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में 350 सरकारी अधिकारियों को आमंत्रित किया गया था। लेकिन, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में 430 लोग शामिल थे। इससे साबित होता है कि बैठक में कुछ लोग बिना बुलाए विवाद खड़ा करने के लिए ही आए थे। 

मैंने पहली बार दो भाषाओं का उपयोग नहीं किया : कोटेचा
कोटेचा के अनुसार उन्होंने पहली बार किसी राष्ट्रीय स्तर की बैठक में दो भाषाओं का इस्तेमाल नहीं किया है। उन्होंने कहा, 'मेरे शब्दों से छेड़छाड़ करने के पीछे के एजेंडा को लेकर मैं निश्चित नहीं हूं। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब मैंने राष्ट्रीय स्तर की वार्ता में दो भाषाओं का इस्तेमाल किया हो।'

उन्होंने कहा, 'उत्तरी भारत खासकर उत्तर प्रदेश क्षेत्र के ट्रेनर हिंदी भाषा में वार्ता करने का अनुरोध करते हैं जबकि दक्षिणी भारत के ट्रेनर अंग्रेजी का। मैं हिंदी में ज्यादा निपुण हूं। लेकिन मैंने हमेशा दोनों भाषाओं में चर्चा करने का प्रयास किया है और इससे पहले कभी कोई समस्या नहीं आई है।'

डीएमके ने की कार्रवाई की मांग, आयुष मंत्री को लिखा पत्र
विवाद के बढ़ने के बाद डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने आरोप लगाया है कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार जबरन हिंदी भाषा थोपना चाहती है और इस घटना से उनका एजेंडा सामने आ गया है। जबकि पार्टी सांसद कनिमोझी ने इस संबंध में आयुष मंत्री श्रीपद नाइक को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की है।
  
कनिमोझी ने ट्वीट किया, 'आयुष मंत्रालय के सचिव का मंत्रालय के ट्रेनिंग सत्र में हिंदी न बोलने वाले प्रतिभागियों को जाने के लिए कहना दिखाता है कि हिंदी को थोपा जा रहा है। यह बेहद निंदनीय है। सरकार को सचिव को निलंबित करना चाहिए। कब तक गैर हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ ऐसा व्यवहार बर्दाश्त किया जाएगा?'
 

वहीं, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा, हिंदी में आयुष मंत्रालय की ट्रेनिंग में तमिलनाडु के प्रतिनिधिमंडल को नजरअंदाज किया गया। अंग्रेजी नहीं जानना समझ में आता है, लेकिन हिंदी नहीं जानने वाले लोगों को जाने के लिए कहना और उन्हें हिंदी में बोलने के लिए मजबूर करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

यह अनुरोध था या हिंदी थोपने का बेशर्म उत्साह : कुमारस्वामी
इस मामले में नाराजगी जताते हुए जद (एस) नेता एचडी कुमारस्वामी ने रविवार को पूछा कि क्या यह हिंदी थोपने के 'शर्मनाक उत्साह' में किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी पूछा कि कन्नड़भाषी समेत अन्य भाषाओं के और कितने लोगों को हिंदी नहीं जानने के लिए इस देश में बलिदान देना होगा।

कुमारस्वामी ने पूछा, 'यह अंग्रेजी नहीं जानने पर किया गया अनुरोध था या हिंदी थोपने का बेशर्म उत्साह।' कन्नड़ में एक के बाद एक किए गए कई ट्वीट में उन्होंने कहा कि इस देश की एकता के लिए संवैधानिक संघवाद एक मंत्र है और हर भाषा यहां संघीय ढांचे का हिस्सा है।

उन्होंने पूछा, 'जब ऐसी स्थिति है तो क्या हिंदी नहीं बोल पाने के लिये क्या लोगों को प्रशिक्षण कार्यक्रम से बाहर जाने के लिये कहना, संघीय व्यवस्था का उल्लंघन नहीं है? संविधान विरोधी नहीं है?' कुमारस्वामी ने कोटेचा के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें