कोरोना संक्रमण के मामले देश में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इसी बीच लोगों को गुमराह करने वाले कई आयुर्वेदिक दवाईयां भी बाजार में आ गई है। लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाली आयुर्वेदिक कंपनियों पर अब आयुष मंत्रालय नकेल कसने जा रहा है।
हाल ही में गुजरात राजकोट की शुक्ला अशर इंपेक्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने आयुध एडवांस नाम से एक दवा लांच की। कंपनी का दावा है कि इस दवाई को 21 अलग-अलग पौधों से तैयार किया गया है। वहीं ये दवा रेमडेसिविर से तीन गुना ज्यादा असरदार है।
कंपनी के इस दावे और गुमराह करने वाले बयान पर आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ड्रग पॉलिसी विभाग ने गुजरात की आयुर्वेदिक लाइसेंसिंग अथॉरिटी को निर्देश दिया है कि लोगों को गुमराह कर इस तरह के उत्पाद बेचने वाली कंपनी पर सख्त कार्रवाई की जाए। इस मामले में गुजरात के ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ फूड एंड ड्रग कंट्रोलर एडमिनिस्ट्रेशन ने कंपनी को शोकाज नोटिस कर जवाब भी मांगा है।
आयुष मंत्रालय ने ज्वाइंट कमिशनर ऑफ फूड एंड ड्रग कंट्रोलर एडमिनिस्ट्रेशन गुजरात को लिखे में पत्र में कहा है कि कंपनी अपने उत्पाद बेचने के लिए जो दावे कर रही है वह आयुर्वेद की रूल बुक के खिलाफ हैं। कंपनी के उत्पाद आयुर्वेदिक मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। कंपनी इस प्रोडक्ट को इंटरडिसिप्लिनरी ऑफ आयुष एंड टास्क फोर्स ऑफ कोविड और इंटरडिसिप्लिनरी टेक्निकल रिव्यू कमेटी पहले ही रिजेक्ट कर चुकी हैं। दोनों ही कमेटी का कहना था कि ये प्रोडक्ट आयुर्वेदिक मानक और उसके प्रोटोकाल पर खरे नहीं उतरते हैं।
वहीं इस दवाई में कुछ ऐसे पदार्थों का उपयोग किया गया, जो कि फर्स्ट शेड्यूल ऑफ ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 को मान्य भी नहीं करते है। इसलिए इसे आयुर्वेदिक प्रोडेक्ट के तौर पर मान्य नहीं किया जा सकता है।
आयुष मंत्रालय ने ज्वाइंट कमिशनर ऑफ फूड एंड ड्रग कंट्रोलर एडमिनिस्ट्रेशन को इस पर कार्रवाई कर रिपोर्ट की मांगी है।