देश में आयुर्वेदिक औषधियों को लेकर अब लोगों में नई तरह की जागरुकता आई है। लोगों में इसके प्रति रुझान बढ़ा है। इसके चलते अब बड़ी संख्या में इंडस्ट्री भी इस ओर कदम रख रहीं हैं। आयुष औषधियों को लेकर बनाए गए नियमों को भी नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। जल्द ही इसका असर भी देखने को मिलेगा।
ये बातें शुक्रवार को केंद्रीय आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वेबिनार से निकलकर सामने आई। 'एएसयू औषधि विनियमन पर नई पहल' विषय पर आयोजित वेबिनार में बतौर वक्ता राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के पूर्व सीईओ डॉ. जेएलएन शास्त्री ने शिरकत की। लंबे समय से आयुर्वेद पर काम कर रहे डॉ. शास्त्री ने आयुष औषधियों और उसके विनिमय को लेकर खुलकर बात की। आइए जानते हैं उन्होंने क्या-क्या बताया?
क्या आयुष प्रणाली अच्छी तरह से विनियमित है?
हां, आयुष प्रणाली बिल्कुल सही तरह से विनियमित है। इनके कानून सही से बनाए गए हैं। 1940 में ड्रग एक्ट लागू हुआ। इसके बाद 1963 में आयुष को रेगुलेट करने के लिए कानून लाया गया। तब से इसे रेगुलेट किया जा रहा है। आयुष से जुड़े सभी सिस्टम, औषधियां कानून के दायरे में हैं। तब से लेकर अब तक कानून में बहुत से संशोधन भी हुए हैं।
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक अधिनियम क्या है? ये आयुष से कैसे जुड़ा है?
1940 में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट आया था। उसके बाद 1945 में इसके रूल्स बने हैं। इसके सेक्शन 3ए और 3 एच के अंतर्गत आयुष से जुड़ी औषधियों को शामिल किया गया है। 3-ए के अनुसार आयुर्वेद के ग्रंथ को आधार मानकर तैयार की गई दवाइयों को मंजूरी दी गई है। इनमें च्यवनप्राश, अशोकारिष्ट, दशमोलारिष्ट जैसी औषधियां शामिल हैं। इसके अलावा कई कंपनियों ने भी अलग से दवाइयां बनाई हैं। जिसे उन्होंने पेटेंट फार्मूला के तहत रजिस्टर्ड कराया है।
क्या बदलाव हुआ है?
2020 में दो बड़े रेगुलेशन और उसमें संशोधन हुए हैं। पहले होमियोपैथिक को एलोपैथिक ड्रग्स के साथ आते थे। उसके रेगुलेशन भी एलोपैथिक ड्रग्स जैसा था। लेकिन बाद में इसको लेकर टेक्निकल टीम ने चर्चा की। बाद में होमियोपैथिक को भी आयुष के अंतर्गत लाया गया। ये बहुत बड़ा कदम था। इससे बहुत फायदा हुआ। इसके साथ-साथ आयुष और होमियोपैथी को बढ़ावा देने के लिए नियमों में भी बदलाव किया गया।
जिन छोटी-छोटी चीजों में पहले आपराधिक मामले दर्ज हो जाते थे और नॉन बेलेबल सेक्शन लग जाते थे उसे भी खत्म कर दिया गया। एक नया एक्ट तैयार हो रहा है, जिसे ड्रग मेडिकल डिवाइसेज एंड कॉस्मेटिक नाम दिया गया है। इसके चैप्टर 5 में आयुष को रखा गया है।
इसमें आयुर्वेद के संशोधन को लेकर भी एक कमेटी बन रही है। ये कमेटी रिसर्च को लेकर अपने-अपने इनपुट देंगे। आने वाले समय में रिसर्च को भी बढ़ावा मिलेगा। इंस्टीट्यूट को ठीक किया जा रहा है। लेबोरेट्री आधुनिक की जा रही है। पहले केवल ऐलौपैथी को देखकर आयुष का काम होता था। हर नियम ऐलौपैथी के हिसाब से बनते थे। अब इसमें बड़ा बदलाव हुआ है। अब आयुष का अलग से नियम बन रहा है। विस्तार से आयुष पर फोकस किया जा रहा है। इससे इंडस्ट्री को भी काफी बढ़ावा मिलेगा।
कोरोना के बाद आयुष में क्या बदलाव हुआ?
कोरोना के बाद आयुष में काफी बदलाव हुआ है। ईज ऑफ डुइंग बिजनेस के तहत आयुष को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब आयुष को लेकर लाइसेंसिंग सिस्टम भी मजबूत हुआ है। दवा बनाने वाले और उसके इस्तेमाल होने तक की जानकारी आयुष मंत्रालय के पास होती है।
घरेलू और निर्यात को लेकर ये अधिनियम कितना कारगर है?
औषधि विनियम घरेलू और निर्यात उत्पाद को लेकर काफी कारगर है। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने भी आयुर्वेद आहार को लेकर एक अलग कैटेगिरी बनाई है। इससे ट्रेडेशनली फूड का भी अच्छे से लोग इस्तेमाल कर सकते हैं। पहले इसको लेकर सही से मानक नहीं थे। अब स्थानीय रहन-सहन और भोजन के अनुसार नियम बने हैं।
क्या दवा के लाइसेंस, क्रय और विक्रय अच्छी तरह से विनियमित हैं?
ये तो आज की तारीख में कानून से ही है। हां, कई बार इसे सही से लागू करने को लेकर सवाल उठते हैं। जब सही से लागू नहीं होता है तो लोग सोचते हैं कि इसको लेकर सही से कानून नहीं बना है। पिछले साल भारत सरकार ने ई-औषधी पोर्टल शुरू किया था। इसके जरिए अब 33 लाइसेंस अथॉरिटी को एक साथ जोड़ दिया गया है। कोई भी इसे ऑनलाइन देख सकता है। इस पर आयुष मंत्रालय नजर रखता है। जो भी लाइसेंस दिए जा रहे हैं, वो ऑनलाइन हो रहे हैं। इज ऑफ डुइंग बिजनेस को देखते हुए ये प्रक्रिया भी काफी सरल कर दी गई है।