एक तरफ पूरा देश और भगवान राम पर आस्था रखने वाले श्रद्धालु 22 जनवरी को होने वाली प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियों में जुटे हैं तो दूसरी तरफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद की तरफ से चौंकाने वाला बयान सामने आया है। शनिवार को जारी एक बयान में महमूद मदनी गुट के जमीयत ने कहा, राम मंदिर से जुड़े कार्यक्रमों में सरकार की सक्रिय भागीदारी चिंताजनक है।
जमीयत ने केंद्र सरकार के पक्षपात से भरी नीतियों को न अपनाने की गुहार भी लगाई। राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के बाद जमीयत की तरफ से बयान जारी किया गया। इसके मुताबिक बैठक में देश में पूजा स्थल कानून, 1991 को लागू करने पर बात हुई। इसके अलावा राम मंदिर से जुड़ी घटनाओं और पश्चिम एशिया में लगभग तीन महीने से जारी इस्राइल हमास संघर्ष पर भी चर्चा की गई।
राम मंदिर के संबंध में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में कहा गया कि अल्पसंख्यक समुदाय को डराने और परेशान करने के प्रयास चिंताजनक हैं। जमीयत ने कहा कि चिंताओं के बारे में सरकार के साथ-साथ देश-प्रदेश की कानूनी एजेंसियों को जानकारी देना जरूरी है। संगठन ने कहा कि समारोह में सरकार की सक्रिय भागीदारी आगामी लोकसभा चुनाव को प्रभावित कर सकती है।
जमीयत ने 'राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवाद' मुकदमे पर 2019 में पारित सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के ऐतिहासिक फैसले से असहमति को भी रेखांकित किया। संगठन ने कहा कि जमीयत सरकार से अपील करती है कि पक्षपातपूर्ण नीतियां अपनाने से बचें।
बैठक में पारित प्रस्ताव में देश के मौजूदा हालात को जमीयत ने चुनौतीपूर्ण करार दिया। संगठन के प्रस्ताव के मुताबिक 'वह देश के नागरिकों से संयम और कानून-व्यवस्था बरकरार रखने की अपील करता है। उकसाने की कोशिशों के बावजूद मुस्लिम पक्ष को निराश न होकर धैर्य बनाए रखना चाहिए।' समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक संगठन के प्रमुख महमूद मदनी ने देश की मस्जिदों की सुरक्षा को संगठन का प्रमुख उद्देश्य करार दिया।