उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद को मध्यस्थता समिति के पास भेजा। इसके लिए अदालत ने तीन सदस्यीय एक समिति का गठन किया है जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश कलीफुल्ला, आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर और वकील श्रीराम पंचू शामिल हैं। उन्हें आठ हफ्तों के अंदर अपनी रिपोर्ट अदालत में सौंपनी होगी। आज हम आपको 30 साल पहले उस दौर में ले जाते हैं जब इसी तरह की एक कोशिश पहली बार की गई थी। हालांकि उसका कोई असर नहीं हुआ। वहीं अतीत में आठ प्रधानमंत्री इसे सुलझाने की कोशिश कर चुके हैं लेकिन उन्हें भी सफलता नहीं मिली।
बातचीत के जरिए पहली बार इस मसले को सुलझाने की कोशिश 1986 में हुई थी। तब कांची के शंकराचार्य और तत्कालीन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के मौलाना अबुल हसन अली हसनानी नदवी जो अली मियां के नाम से मशहूर हैं ने इसपर बातचीत की थी। बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी के संयोजक जाफरयाब जिलानी का इस बातचीत पर कहना है, 'अली मियां ने शंकराचार्य से बात की जो मामले से संबंधित बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हो गए जबकि अदालत में मामला जारी था। एक प्रस्ताव बनाया गया और बोर्ड के सदस्य बातचीत के लिए मान गए लेकिन शंकराचार्य पीछे हट गए और उन्होंने इसके लिए माफी मांगी। उनका कहना था कि उनपर कई तरफ से दबाव है।'
जिलानी ने कहा, 'उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई शुक्रवार को की गई मध्यस्थता की कोशिश पहली कानूनी पवित्रता होगी।' इसके बाद 1990 में आपसी सहयोग से इस मसले का हल निकालने का प्रयास किया गया था। उस समय उच्चतम न्यायालय के नेतृत्व में तत्कालीन केंद्र सरकार ने इसे सुलझाने का प्रयास किया था। 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने कुछ अधिकारियों के जरिए अदालत के बाहर समझौते की पहल की लेकिन इससे पहले कि वह प्रक्रिया को औपचारिक रूप दे पाते उन्हें हटा दिया गया और उनकी जगह चंद्रशेखर को प्रधानमंत्री बनाया गया।
1991 में चंद्रशेखर ने अदालत के बाहर समझौता करने की कोशिश की और इसके लिए उन्होंने विवादित तांत्रिक चंद्रस्वामी की नियुक्ति की। जिसने दोनों पक्षों ने कई दौर की बैठक की। उस समय गृह राज्यमंत्री रहे सुबोध कांत सहाय ने एक उच्च स्तरीय समिति का निर्माण किया जिसमें तीन मुख्यमंत्री- मुलायम सिंह यादव, शरद पवार और भैरों सिंह शेखावत शामिल थे। इससे पहले कि यह समिति कोई कार्य कर पाती संसद भंग हो गई और नए सिरे से चुनाव हुए।