सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सभी पक्षकार पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) दाखिल करने का अधिकार रखते हैं। यानि वह फैसले के खिलाफ ऐसी याचिका दे सकेंगे। जिस पर पीठ सुनवाई कर सकती है।
हालांकि कोर्ट अपने अधिकार के तहत याचिका को तुरंत सुनने, बंद कक्ष में सुनने या खुली अदालत में सुनने का फैसला करेगी। पीठ याचिका को खारिज भी कर सकती है। सिर्फ यही नहीं वह याचिका को बड़ी पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए भेज सकती है।
पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) वह है जिसमें पक्षकार की ओर से अदालत से उसके दिए फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया जाता है। यदि अदालत इस याचिका पर फैसला दे देती है इसके बाद भी पक्षकारों के पास एक और विकल्प रहता है।
यह विकल्प उपचार याचिका (क्यूरेटिव पिटीशन) दाखिल करने का है। यह पुनर्विचार याचिका से थोड़ी भिन्न है। इसमें फैसले की जगह मामले से जुड़े उन मुद्दों या विषयों को रेखांकित किया जाता है जिन पर ध्यान दिए जाने की जरूरत हो।
यह दूसरा और अंतिम विकल्प है। इस पर संबंधित पीठ सुनवाई कर सकती है, याचिका खारिज कर सकती है। यदि याचिका खारिज होती है तो इसका अर्थ है केस खत्म कर दिया गया है और जो निर्णय दिया गया है वह सर्वमान्य होता है।