कोर्ट जो भी निर्णय देगा वह मानेंगे : इकबाल अंसारी
सुलह-समझौते की जो बात सामने आ रही है उसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। फिलहाल समझौते का अब कोई औचित्य इसलिए नहीं दिखता, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में मामले की नियमित सुनवाई चल रही है, उम्मीद है कि जल्द ही निर्णय आ जाएगा। कोर्ट जो भी निर्णय देगा वह मानेेंगे। (मुस्लिम पक्षकार)
हताश-निराश लोग अटका रहे रोड़ा : त्रिलोकीनाथ
हताश-निराश लोग मंदिर निर्माण में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं। चूंकि मुस्लिम पक्ष पूरी तरह से केस हार रहा है इसलिए वह पलायन की मुद्रा में है और नई तरकीब खोज निकाली है। (रामलला के सखा)
राममंदिर निर्माण में बाधा डालने का प्रयास: शरद शर्मा
यह राममंदिर निर्माण में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास है। ऐसे लोग पिछले 70 वर्षों से मामले में रोड़ा अटका रहे हैं। अब जब उन्हें पराजय का डर सताने लगा है तो वे पलायन की नीति तैयार कर रहे हैं और बाबरी समर्थक होने का सुबूत पेश कर रहे हैं। (विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता)
अयोध्या पर कभी सफल नहीं हुई समझौता की कोशिशें
अयोध्या विवाद में सुलह-समझौते की कोशिशें कई बार हो चुकी हैं। पहले भी कई बार अलग अलग पक्षों ने या तो मध्यस्थता की कोशिश की या फिर पेशकश की, लेकिन हर बार यह पहल किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई। राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, चंद्रशेखर और नरसिम्हा राव सरकार में समझौते की कोशिशें भी बेअसर रहीं। 134 साल पहले यह मामला न्यायालय पहुंचा था, 69 साल से मामले की सुनवाई चल रही है।