जैन समुदाय द्वारा किए जाने वाले अयंबिल ओली तप के दौरान मंदिरों से विशेष भोजन घर ले जाने का मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा है। एक याचिका में इसकी इजाजत मांगी गई है। इस पर हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से राय मांगी है।
जैन समुदाय के लोग नौ दिनों तक वार्षिक ‘अयंबिल ओली तप’ करते हैं। इस उपवास के दौरान वे अपने मंदिरों से विशेष भोजन घर ले जाते हैं। इस बार चूंकि कोरोना के चलते कई पाबंदियां लगी हैं, इसलिए अदालत ने राज्य सरकार से इस पर राय मांगते हुए इसे 'तर्कसंगत अनुरोध बताया है। अयंबिल ओली तप के दौरान जैन समुदाय के लोग एक विशेष प्रकार का उबला हुआ भोजन करते हैं। यह बिल्कुल सादा भोजन होता है।
दो जैन ट्रस्टों ने दायर की याचिका
न्यायमूर्ति एस सी गुप्त और न्यायामूर्ति अभय आहूजा की पीठ दो जैन ट्रस्टों की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका के जरिए समुदाय के सदस्यों को न्यास के परिसरों से उपवास के दौरान उबला हुआ विशेष भोजन घर ले जाने देने की अनुमति मांगी गई है। ट्रस्टों के अधिवक्ता प्रफुल्ल शाह ने कहा कि वे मंदिरों या डायनिंग हॉल को लोगों को आकर भोजन करने देने के लिए खोले जाने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि भोजन घर ले जाने देने की अनुमति मांग रहे हैं।
पाबंदी में भी होटल व बार से खाना ले जाने की अनुमति
अधिवक्ता ने कहा, 'संक्रमण की कड़ी को तोड़िए' शीर्षक वाले 13 अप्रैल के सरकारी आदेश में रेस्तरां और बार को घर पर खाने-पीने की चीजें पहुंचाने और वहां से भोजन पैक करा कर घर ले जाने की अनुमति दी गई है। हम भी इसी तरह की ही अनुमति मांग रहे हैं। यह अनुमति सिर्फ नौ दिनों के लिए, 19 अप्रैल से 27 अप्रैल तक मांगी गई है। इस दौरान मंदिरों में कोई भीड़ नहीं लगेगी।
मंदिर में भीड़ नहीं होना चाहिए
अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने कहा कि लोगों को भोजन के अपने पार्सल लेने के लिए इन मंदिरों में नहीं उमड़ना चाहिए। इस पर , अदालत ने भोजन पार्सल पहुंचाने के लिए स्वयंसेवकों के उपयोग का सुझाव दिया। हाईकोर्ट ने कहा, 'स्वयंसेवक पार्सल पहुंचा सकते हैं। (जैन) समुदाय में कई अच्छे लोग है। हम सिर्फ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या समाधान हो सकता है।'
सरकार करे अनुरोध पर विचार
कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से इस विषय पर विचार करने को कहा। पीठ ने कहा, 'यह एक तर्कसंगत अनुरोध जान पड़ता है। वे (याचिकाकर्ता) धार्मिक स्थलों को नहीं खोलने जा रहे हैं, बल्कि सिर्फ भोजन के पार्सल देने जा रहे हैं।' बहरहाल, पीठ ने याचिकाओं की सुनवाई शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध कर दी।