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Axiom-4 Mission: वायुसेना ने बताया डेजा वू मोमेंट; राष्ट्रपति-PM और राजनाथ भी शुभांशु के ISS जाने से उत्साहित

Wed, 25 Jun 2025 03:01 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

भारत के शुभांशु शुक्ल तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए रवाना हो गए हैं। शुभांशु की इस ऐतिहासिक यात्रा को लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल है। भारतीय वायुसेना ने इस उपलब्धि को खास अनुभूति यानी डेजा वू मोमेंट बताया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे लोगों ने भी इस मौके को विशिष्ट बताते हुए शुभांशु समेत तीनों अंतरिक्ष यात्रियों को शुभकामनाएं दी हैं। जानिए एक्सिओम-4 मिशन को लेकर किसने क्या कहा
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तीन अन्य साथियों के साथ शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा को लेकर भारत में उत्साह (फाइल) - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने आज इतिहास रच दिया। वह 41 वर्ष बाद खास उपलब्धि को हासिल करने वाले दूसरे भारतीय बन गए। शुभांशु से पहले राकेश शर्मा लगातार आठ दिन तक पृथ्वी के चक्कर लगाने के बाद अंतरिक्ष पहुंचे थे। शुभांशु तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) गए हैं। वे अंतरिक्ष यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। वायुसेना ने शुभांशु की इस खास उपलब्धि को डेजा वू मोमेंट बताया है। वायुसेना के अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी शुभांशु के ISS जाने और मिशन की सफलता को लेकर शुभकामनाएं दी हैं।
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वायुसेना ने शुभांशु की अंतरिक्ष यात्रा पर क्या कहा?
शुभांशु की अंतरिक्ष यात्रा से उत्साहित वायुसेना ने कहा कि यह भारत के लिए एक अभूतपूर्व क्षण है। एक्सिओम-4 मिशन में शुभांशु का शामिल होने से देश के निरंतर विस्तृत होते क्षितिज की पुष्टि होती है। वायुसेना ने कहा, शुभांशु ने एक ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा शुरू की है, जो देश के गौरव को पृथ्वी से परे ले जाएगी।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (फाइल) - फोटो : एएनआई
शुभांशु के साथ अमेरिका, पोलैंड और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री... वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक्सिओम-4 मिशन पर कहा कि शुभांशु शुक्ला ने नया मील का पत्थर स्थापित किया, पूरा देश एक भारतीय की अंतरिक्ष यात्रा से उत्साहित और गौरवान्वित है। शुभांशु की अंतरिक्ष यात्रा को लेकर राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी संदेश में लिखा गया, 'शुभांशु समेत अमेरिका, पोलैंड और हंगरी के उनके साथी अंतरिक्ष यात्री साबित करते हैं कि दुनिया वास्तव में एक परिवार है - 'वसुधैव कुटुम्बकम'। एक्सिओम-4 मिशन की सफलता के लिए शुभकामनाएं। यह अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी- नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच स्थायी साझेदारी को दर्शाता है। चालक दल के व्यापक प्रयोग वैज्ञानिक अध्ययन और अंतरिक्ष अन्वेषण की नई सीमाओं को जन्म देंगे।'

पीएम मोदी (फाइल) - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब- पीएम मोदी
शुभांशु अपने साथ 1.4 बिलियन भारतीयों की इच्छाएं, उम्मीदें और आकांक्षाएं लेकर अंतरिक्ष गए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभांशु की अंतरिक्ष यात्रा को लेकर कहा कि वे एक्सिओम-4 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर रवाना हुए यान के सफल प्रक्षेपण का स्वागत करते हैं। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर जाने वाले पहले भारतीय बनने की राह पर हैं। वे अपने साथ 1.4 बिलियन भारतीयों की इच्छाएं, उम्मीदें और आकांक्षाएं लेकर गए हैं। उन्हें और अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को सफलता की शुभकामनाएं! बता दें कि एक्सिओम-4 मिशन में भारत के अलावा हंगरी, पोलैंड और अमेरिका के अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हैं।

राजनाथ सिंह (फाइल) - फोटो : एएनआई
खगोलीय अन्वेषण के इतिहास में मील का पत्थर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी शुभांशु को अंतरिक्ष मिशन की कामयाबी के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस उपलब्धि पर सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, भारत सहित चार देशों के अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाला अंतरिक्ष मिशन खगोलीय अन्वेषण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
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एक्सियोम-4 मिशन के जरिए आईएसएस पर पहुंचेंगे शुभांशु समेत चार अंतरिक्ष यात्री - फोटो : अमर उजाला
अंतरिक्ष में क्या है एक्सिओम-4 मिशन का मकसद
गौरतलब है कि एक्सिओम मिशन 4 पर शुक्ला के अनुभव का इसरो के गगनयान अंतरिक्ष उड़ान मिशन में बहुत अच्छी तरह से उपयोग किया जाएगा। इसरो एक्सिओम-4 मिशन पर 550 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। शुक्ला आईएसएस पर सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण स्थितियों में मेथी और मूंग (हरा चना) अंकुरित करने जैसे प्रयोग करेंगे। शुक्ला बीजों को मैक्रोबायोटिक स्थितियों के संपर्क में लाएंगे और उन्हें वापस धरती पर लाएंगे, जहां उन्हें न सिर्फ एक बार बल्कि पीढ़ियों तक पौधों के रूप में उगाया जाएगा।

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