राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (फाइल)
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शुभांशु के साथ अमेरिका, पोलैंड और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री... वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक्सिओम-4 मिशन पर कहा कि शुभांशु शुक्ला ने नया मील का पत्थर स्थापित किया, पूरा देश एक भारतीय की अंतरिक्ष यात्रा से उत्साहित और गौरवान्वित है। शुभांशु की अंतरिक्ष यात्रा को लेकर राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी संदेश में लिखा गया, 'शुभांशु समेत अमेरिका, पोलैंड और हंगरी के उनके साथी अंतरिक्ष यात्री साबित करते हैं कि दुनिया वास्तव में एक परिवार है - 'वसुधैव कुटुम्बकम'। एक्सिओम-4 मिशन की सफलता के लिए शुभकामनाएं। यह अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी- नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच स्थायी साझेदारी को दर्शाता है। चालक दल के व्यापक प्रयोग वैज्ञानिक अध्ययन और अंतरिक्ष अन्वेषण की नई सीमाओं को जन्म देंगे।'
शुभांशु अपने साथ 1.4 बिलियन भारतीयों की इच्छाएं, उम्मीदें और आकांक्षाएं लेकर अंतरिक्ष गए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभांशु की अंतरिक्ष यात्रा को लेकर कहा कि वे एक्सिओम-4 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर रवाना हुए यान के सफल प्रक्षेपण का स्वागत करते हैं। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर जाने वाले पहले भारतीय बनने की राह पर हैं। वे अपने साथ 1.4 बिलियन भारतीयों की इच्छाएं, उम्मीदें और आकांक्षाएं लेकर गए हैं। उन्हें और अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को सफलता की शुभकामनाएं! बता दें कि एक्सिओम-4 मिशन में भारत के अलावा हंगरी, पोलैंड और अमेरिका के अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हैं।
खगोलीय अन्वेषण के इतिहास में मील का पत्थर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी शुभांशु को अंतरिक्ष मिशन की कामयाबी के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस उपलब्धि पर सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, भारत सहित चार देशों के अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाला अंतरिक्ष मिशन खगोलीय अन्वेषण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
एक्सियोम-4 मिशन के जरिए आईएसएस पर पहुंचेंगे शुभांशु समेत चार अंतरिक्ष यात्री
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अंतरिक्ष में क्या है एक्सिओम-4 मिशन का मकसद
गौरतलब है कि
एक्सिओम मिशन 4 पर शुक्ला के अनुभव का इसरो के गगनयान अंतरिक्ष उड़ान मिशन में बहुत अच्छी तरह से उपयोग किया जाएगा। इसरो एक्सिओम-4 मिशन पर 550 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। शुक्ला आईएसएस पर सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण स्थितियों में मेथी और मूंग (हरा चना) अंकुरित करने जैसे प्रयोग करेंगे। शुक्ला बीजों को मैक्रोबायोटिक स्थितियों के संपर्क में लाएंगे और उन्हें वापस धरती पर लाएंगे, जहां उन्हें न सिर्फ एक बार बल्कि पीढ़ियों तक पौधों के रूप में उगाया जाएगा।
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