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Temple Attack: ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त बोले- मंदिरों पर हमलों को लेकर हम सख्त, खालिस्तान मामले में कही यह बात

Thu, 14 Dec 2023 02:18 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन बुधवार को नई दिल्ली के एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में पहुंचे। यहां उन्होंने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि हम हिंदू मंदिरों पर हो रहे हमलों को गंभीरता से लेते हैं।
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भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन - फोटो : Social Media
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विस्तार
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ऑस्ट्रेलिया में हिंदू मंदिरों पर लगातार हो रहे हमलों के बीच ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त ने कहा कि हम हमलों को लेकर बहुत अधिक गंभीर हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए हमारे पास काफी अनुभव है। बता दें, ऑस्ट्रेलिया में हिंदू मंदिरों पर हमला कहीं अधिक बढ़ गया है। खास बात यह है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे से ठीक पहले सिडनी के एक बड़े हिंदू मंदिर पर हमला हुआ था। हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त के अनुसार वे हमलों को निष्क्रिय करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
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मंदिरों पर हमले को लेकर कही यह बात
भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन बुधवार को नई दिल्ली के एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में पहुंचे। यहां उन्होंने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि हम हिंदू मंदिरों पर हो रहे हमलों को गंभीरता से लेते हैं। जैसे हम अपने समाज में हो रही अन्य हिंसक घटनाओं पर गंभीर होते हैं। हमारी पुलिस, खुफिया एजेंसियों सहित अन्य संस्थाओं के पास ऐसे मामलों से निपटने का बहुत अनुभव है। हमारे देश में हिंसा नहीं फैलाई जा सकती है।

खालिस्तान के मुद्दे पर बोले- हम भारत के साथ
ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तान के बढ़ते प्रभाव को लेकर किए गए सवाल पर ग्रीन ने कहा कि हम इस मुद्दे पर भारत के साथ हैं। ऑस्ट्रेलिया सिर्फ फाइव आइज का भागीदार होने के कारण यह बात नहीं कह रहा, बल्कि हम एक मित्र के रूप यह बात कह रहे हैं। हम भारत का सम्मान करते हैं। हमारे रिश्ते काफी ज्यादा मजबूत हैं। हम पीठ पीछे भी संवेदनशील मुद्दों पर चिंता जाहिर करते हैं और सावधानी से चर्चा कर उन्हें मिटाने की कोशिश करते हैं। 
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व्यापर सहित अन्य द्विपक्षीय मुद्दों को लेकर चर्चा
ऑस्ट्रेलियाई राजदूत ने आगे कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध अब तक के इतिहास में सबसे उच्च स्तर पर है। बावजूद इसके मैं यहां हूं, तो सिर्फ आराम करने के लिए नहीं। मैं यहां रिश्तों को और मजबूत करने के लिए आया हूं। जब मुझे हमारे प्रधानमंत्री ने भारत भेजा था, तब उन्होंने मुझसे रिश्तों की मजबूती पर खास ध्यान देने के लिए कहा था। हम व्यापार, वाणिज्य, क्वाड सहित कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हैं। हमारा व्यापार पिछले पांच वर्षों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है। पिछले वर्ष ही हमने आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर भी किए। 

पीएम मोदी भी जता चुके हैं ऐतराज
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो हिंदू मंदिरों पर हमले सहित सुरक्षा के मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एंथनी अल्बानीज भी चर्चा कर चुके हैं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की यात्रा के दौरान भी पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम के सामने हमलों का मुद्दा उठाया था। पीएम मोदी ने कहा कि हम भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच मैत्रीपूर्ण और मधुर संबंधों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी तत्व को स्वीकार नहीं करेंगे। हम इन सबके खिलाफ हैं। नई दिल्ली ने भी अपराधियों को पकड़ने के लिए शीघ्र जांच की मांग की। 

इसी साल जनवरी में ही तीन हमले  
12 जनवरी को हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की घटना सामने आई। तब मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे भी लिखे गए थे। इसके बाद 17 जनवरी को भी इसी तरह की घटना एक हिंदू मंदिर में हुई। 15 दिन के अंदर तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत में एक मंदिर को निशाना बनाया गया। दीवारों पर भारत-विरोधी नारे लिखे हैं। घटना के बाद ऑस्ट्रेलिया हाई कमिश्नर बैरी ओफैरल ने ट्वीट करके कहा था कि भारत की तरह ऑस्ट्रेलिया भी कई संस्कृतियों वाला देश है। हम मेलबर्न में हिंदू मंदिरों के साथ तोड़फोड़ की घटना देखकर दंग हैं। इस मामले में ऑस्ट्रेलियाई एजेंसियां जांच कर रही हैं। हम अभिव्यक्ति की आजादी को पुरजोर समर्थन देते हैं। लेकिन इसमें नफरती भाषणों और हिंसा की जगह नहीं है।’ 

मंदिरों को क्यों बनाया जा रहा निशाना?
विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल ने कहा कि ये काम खालिस्तानी समर्थक कर रहे हैं। ये स्पष्ट हो चुका है। दरअसल वह इसके जरिए पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहते हैं। वह अपनी नाजायज मांगों के समर्थन में बाकी देशों में भी समर्थन चाहते हैं। इसके लिए इस तरह का अभियान शुरू किया गया है। डॉ. आदित्य के अनुसार, हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ करके और भारत विरोधी नारे लिखकर वह चर्चा में आना चाहते हैं। इसके पीछे पाकिस्तान जैसे देशों की शह भी शामिल है। ये भारत में अस्थिरता लाने के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं। जब कश्मीर में आतंकी घटनाओं पर सरकार ने सख्त कदम उठाना शुरू किया तो इन लोगों ने दूसरे तरह से अपनी मुहिम को तेज करना शुरू कर दिया है। अब ये खालिस्तानी समर्थकों का सहारा ले रहे हैं। 
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