ऑरोविल फाउंडेशन ने अफसानेह गेस्ट हाउस को कब्जे में लिया है। अधिकारियों ने बताया कि यह गेस्ट हाउस ऑरोविल फाउंडेशन की पंजीकृत सामूहिक संपत्ति है। इसके पूर्व केयरटेकरों पर अवैध कब्जे, गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं। वहीं दूसरी ओर इस घटनाक्रम पर ऑरोविल फाउंडेशन की रेसिडेंट्स असेंबली की तरफ से चुनी गई कार्यकारी समिति ने भी बयान जारी कर आरोपों को निराधार बताया है।
फाउंडेशन के अधिकारियों ने एटीएसटी, कानूनी टीम, टाउन डेवलपमेंट काउंसिल (एटीडीसी) और सुरक्षा टीम के सहयोग से यह कदम उठाया। परिसर के ताले आधिकारिक निगरानी में बदल दिए गए। गेस्ट हाउस के नए कार्यकारी अधिकारी पहले ही नियुक्त किए जा चुके हैं, जो ऑरोविल फाउंडेशन अधिनियम, 1988 के तहत गवर्निंग बोर्ड की शक्तियों के अनुरूप है। गौरतलब है कि मद्रास हाईकोर्ट ने 2023 में एक पिछली रिट याचिका को खारिज करते हुए, फाउंडेशन के अधिकारियों के इस अधिकार को पहले भी सही ठहराया था। फाउंडेशन ने स्पष्ट किया है कि ऑरोविल की सभी संपत्तियां, चाहे वह इमारत हो या गेस्ट हाउस, सामूहिक लाभ के लिए ट्रस्ट के रूप में रखी गई हैं। उन्हें निजी संपत्ति के रूप में नहीं माना जा सकता। सामूहिक संपत्तियों का अनाधिकृत कब्जा या वित्तीय दुरुपयोग ऑरोविल फाउंडेशन अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत तत्काल प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई को आमंत्रित करेगा।
रेसिडेंट्स असेंबली की कार्यकारी समिति ने कहा- आरोप पूरी तरह निराधार
अब इस मामले पर ऑरोविल फाउंडेशन की रेसिडेंट्स असेंबली की तरफ से चुनी गई कार्यकारी समिति की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया है। समिति की ओर से जारी बयान के मुताबिक, केयरटेकर पर लगाए गए अवैध कब्जे और गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप निराधार हैं। जिन्हें पूर्व केयरटेकर बताया जा रहा है, वे विधिवत रूप से नियुक्त कार्यकारी और प्रबंधन टीम के सदस्य थे। जिस टीम को जबरन हटाया गया था, उसके तीन साल के प्रबंधन के दौरान गेस्ट हाउस की आय दोगुनी से भी अधिक हो गई थी। आय की राशि का इस्तेमाल सामुदायिक सेवाओं में भी किया गया।
समिति का कहना है कि वित्तीय अनियमितता के आरोपों का कोई ठोस प्रमाण या औपचारिक सूचना कभी सामने नहीं आई है। 16 अक्तूबर 2025 को कार्यकारी टीम ने आधिकारिक हस्तांतरण का अनुरोध किया था। इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया और अधिग्रहण करने वालों द्वारा इसे "अनावश्यक" बताकर खारिज कर दिया गया था।
क्या है मामला
यह मामला तब सामने आया जब ऑरोविल के दो पंजीकृत निवासियों ने, बार-बार औपचारिक नोटिस और निर्देशों के बावजूद, गेस्ट हाउस की चाबियां सौंपने और संपत्ति खाली करने से इन्कार कर दिया था। जांच में सामने आया कि पिछले कई वर्षों से गेस्ट हाउस गंभीर कुप्रबंधन का शिकार था। ऑडिट में कई वित्तीय अनियमितताएं सामने आई। इनमें अपुष्ट नकद लेनदेन, गैर-हिसाबी आय और अतिथि राजस्व के संभावित गबन का संकेत देने वाली गंभीर कमियां शामिल हैं। संपत्ति पर कब्जा जमाए रखने वाले इन व्यक्तियों ने ऑरोविल के वित्तीय नियमों के तहत आवश्यक पूरे रिकॉर्ड जमा करने और वित्तीय अंतरों का समाधान करने में भी बार-बार विफलता दिखाई।