अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामले की जांच में नया मोड़ आ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में साक्ष्य मुहैया कराने के लिए जिन देशों को लेटर्स रोगेटरी भेजा था, वहां से जवाब आने लगे हैं। हालांकि अभी बहुत से जवाब बाकी हैं, लेकिन कई देशों ने यह साफ कर दिया है कि वे अगस्ता वेस्टलैंड मामले में हुए लेन-देन की जानकारी (शेल कंपनियां) मुहैया कराने के लिए तैयार हैं।
जांच एजेंसी ने इस मामले में अभी तक जितने भी आरोपियों से पूछताछ की है, उसके आधार पर एक रिपोर्ट तैयार कर उसे कई देशों को भेजा है। इसे लेटर्स रोगेटरी का कहा जाता है। मतलब, किसी मामले में साक्ष्य मुहैया कराने के लिए एक देश को भेजा गया प्रार्थना पत्र। ईडी ने ब्रिटेन, इटली और दुबई को भेजे लेटर्स रोगेटरी में रतुल पुरी, राजीव सक्सेना, दीपक तलवार और इस मामले में नामजद दूसरे आरोपियों की जानकारी मांगी है। उक्त देशों में इन सभी लोगों की शेल कंपनियां बताई गई हैं।
विदेशों से भी कुछ ईमेल आ रहे हैं। जांच अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही इस केस से जुड़े कई ठोस साक्ष्य उनके पास पहुंच जाएंगे। ईडी का कहना है कि रतुल पुरी को अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल से छह करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा पुरी ने अपनी शेल कंपनियों में किन नेताओं का धन लगाया है, ये तथ्य भी धीरे धीरे बाहर निकल रहे हैं। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान ईडी अदालत से रतुल पुरी को हिरासत में भेजने की मांग करेगी।
अभी तक इस मामले में जितनी भी पूछताछ हुई है, उसमें कुछ शेल कंपनियां ऐसी मिली हैं, जिनका जिक्र क्रिश्चियन मिशेल ने किया था। सीबीआई ने जब मिशेल से पूछताछ की थी तो उसने एक पेज पर कोड वर्ड में कुछ लिखा था। उस वक्त कई लोगों ने कोड वर्ड के नामों को एक राजनीतिक पार्टी के बड़े लोगों से जोड़ दिया था। उसके बाद अदालत में ईडी को मिशेल के पास से एक कागज मिला था। उसमें कथित तौर पर 'मिसेज गांधी' लिखा था।
हालांकि, अभी तक इस बाबत कुछ साफ निकलकर नहीं आया है। अब रतुल पुरी से हुई पूछताछ में मिशेल और दूसरे आरोपियों की कड़ियां जुड़ रही हैं। घूस की राशि का पैसा पुरी की किन कंपनियों में लगा है, उसे दुबई से कब और किसने ट्रांसफर किया, ये सब जानकारी एजेंसी ने जुटा ली है। एजेंसी को उम्मीद है कि जैसे ही विदेशों से साक्ष्य आएंगे, अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले की जांच अपने अंतिम दौर में पहुंच जाएगी।