जांच एजेंसियों के मुताबिक, मिशेल ने अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदा पक्का कराने के लिए कुछ लोगों को घूस दी थी। इनमें भारतीय राजनेता, रक्षा मंत्रालय के अफसर एवं दूसरे नौकरशाह शामिल थे। इस सौदे में जिन लोगों को घूस मिली थी, मिशेल ने उनके नाम एक सादे कागज पर कोड वर्ड में लिख रखे थे।
यूएई की सुरक्षा एजेंसियों ने फरवरी 2017 में जब मिशेल को गिरफ्तार किया तो उसके पास यह कागज बरामद हुआ था। उसके बाद मामले की जांच-पड़ताल के लिए सीबीआई व ईडी की टीम कई बार दुबई गई, लेकिन केस में कुछ खास हासिल नहीं हो पाया। उलटे, मिशेल के वकील ने भारतीय एजेंसियों पर ही यह आरोप जड़ दिया कि वे जानबूझकर मेरे मुव्वकिल से भारत के एक टॉप राजनेता का नाम उगलवाना चाहती हैं।
ईडी और सीबीआई ने यूएई के जांच अधिकारियों एवं न्यायालय के सामने हेलिकॉप्टर सौदे से जुड़े तमाम साक्ष्य, आरोप पत्र, गवाहों के बयान और अन्य कई अहम दस्तावेज भी प्रस्तुत किए थे, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। चूंकि मिशेल अब सीबीआई की हिरासत में है, इसलिए अफसर उसके सामने कई साक्ष्य रखकर पूछताछ कर रहे हैं।
ये शब्द दरअसल वो कोडवर्ड हैं जो मिशेल ने लिखे थे। कोड वर्ड में घूस की राशि भारतीय करेंसी यानी रुपये और यूके करंसी (पौंड) के साइन से अंकित की गई थी। पेज में 10 लाख, 50 लाख, दो करोड़, 250 यूएस व 70 यूरो आदि शब्द लिखे हैं। इसके अलावा जिन लोगों को घूस की राशि मिली है, उनके नाम भी कोड वर्ड में हैं।
पोल खुली तो सौदा रद्द कर दिया गया था
आरोप है कि 2010 में यूपीए सरकार के दौरान इस डील को कराने के लिए मिशेल का नाम सामने आया था। एंग्लो-इटैलियन कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड ने भारतीय राजनेताओं, रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों, नौकरशाहों समेत वायुसेना के दूसरे अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए मिशेल को करीब 350 करोड़ रुपए दिए थे। 2013 में जब इस सौदे की पोल खुली तो तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटोनी ने न केवल यह सौदा रद्द कर दिया, बल्कि सीबीआई जांच के आदेश भी दे दिए थे।