अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने शुक्रवार को चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर कहा कि जजों को ऐसा नहीं करना चाहिए था। उन्होंने उम्मीद जताई है कि कल तक इस मामले को सुलझाने की उम्मीद है।
<blockquote class="twitter-tweet" data-lang="en"><p lang="en" dir="ltr">Today's press conference could have been avoided, but the Supreme Court judges are all statesman with vast experience and knowledge, and I am sure by tomorrow, the entire issue would be resolved: Attorney General (AG) K K Venugopal to ANI</p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/951808637789356033?ref_src=twsrc%5Etfw">January 12, 2018</a></blockquote>
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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों द्वारा मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के खिलाफ सार्वजनिक रूप से मोर्चा खोलने की अभूतपूर्व घटना के बाद सरकार में हलचल बढ़ गई है।
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जजों के प्रेस कांफ्रेंस के तत्काल बाद महाधिवक्ता से बातचीत की और खुद पीएम मोदी को ताजा स्थिति से अवगत कराया। इस मामले में पूरी तरह से चुप्पी साध कर सरकार ने इसे न्यायपालिका का अंदरूनी मामला बताने का साफ संदेश दे दिया है। हालांकि सरकार की निगाहें सीजेआई दीपक मिश्रा के भावी रुख पर है।
हालांकि सरकार ने इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, मगर इस घटना से सरकार के अंदर हलचल बहुत तेज हो गई है। सीजेआई पर निशाने को सरकार पर भी परोक्ष निशाना साधे जाने के रूप में देखा जा रहा है। चूंकि मामले के शीर्ष अदालत से जुड़े होने के कारण सरकार इस मामले में दखल नहीं दे सकती, मगर सरकार इस कारण होने वाले सियासी नुकसान को ले कर सतर्क है।
चार वरिष्ठ जजों द्वारा सीजेआई पर सीधा हमला मामले में भले ही सरकार और भाजपा ने चुप्पी साध ली, मगर पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी इन जजों के बचाव में उतर पड़े।
उन्होंने इन जजों को ज्ञानी और काबिल बताते हुए कहा कि खुद पीएम को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। जबकि पार्टी इस मामले में विपक्ष के आधिकारिक रुख का इंतजार कर रही है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि इस बारे में कोई भी आधिकारिक टिप्पणी विपक्ष के आधिकारिक बयान के बाद ही दिया जाएगा। हालांकि सरकार और पार्टी में इसे न्यायपालिका का अंदरूनी मामला बताने को ले कर सहमति बन चुकी है।