गीता प्रेस के कर्मचारियों ने की आत्मदाह की कोशिश
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नौकरी पर वापस रखने की मांग लेकर निष्कासित कर्मचारियों ने गीता प्रेस के सामने आत्मदाह की कोशिश की, लेकिन सादे लिबास में वहां पहले से तैनात पुलिस कर्मियों ने बलपूर्वक उन पर काबू पा लिया और गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। दोपहर में हुए इस हंगामे के चलते गीता प्रेस के पास करीब एक घंटे तक अफरातफरी मची रही।
तकरीबन डेढ़ साल पहले गीता प्रेस प्रबंधन ने 17 लोगों को नौकरी से निकाल दिया था। कई स्तर की वार्ता के बाद प्रबंधन ने इनमें से 12 लोगों को नौकरी पर वापस रख लिया, लेकिन पांच कर्मचारियों को नहीं रखा। कर्मचारियों का आरोप है कि इनके अलावा समय-समय पर कई अन्य अस्थायी कर्मचारियों को भी नौकरी से बाहर कर दिया गया।
इसी मुद्दे को लेकर निष्कासित कर्मचारी आंदोलनरत हैं। सिटी मजिस्ट्रेट, सहायक श्रमायुक्त, गीता प्रेस प्रबंधन से डीएम दफ्तर में हुई वार्ता के विफल होने के बाद कर्मचारियों ने सोमवार को आत्मदाह की चेतावनी दी थी। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ये कर्मचारी सोमवार को गीता प्रेस के मुख्य गेट के पास पहुंचे। हालांकि इसके पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट, सहायक श्रमायुक्त पुलिस बल के साथ पहुंच चुके थे।
खुद पर उड़ेल लिया तेल
कई कर्मचारियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
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गीता प्रेस प्रबंधन से इस मसले पर वार्ता भी हुई, लेकिन फिर कोई परिणाम नहीं निकला। इसके बाद इन कर्मचारियों ने खुद पर मिट्टी का तेल उड़ेल लिया और आग लगाने के लिए माचिस भी जला ली, लेकिन इसी दौरान वहां पहले से मौजूद पुलिस ने उन पर बलपूर्वक काबू पा लिया।
पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया उनमें जगदीश मिश्र, अजय सिंह, गोपाल शुक्ल, संजीव उपाध्याय, जितेंद्र बहादुर, केशव सिंह, जयप्रकाश सिंह शामिल हैं। गिरफ्तार करने के बाद उन्हें सिटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
गीता प्रेस प्रबंधन किसी भी हाल में इन कर्मचारियों को वापस लेने को तैयार नहीं है। हालांकि इन कर्मचारियों में से पांच ने नियमानुसार क्षतिपूर्ति लेने पर सहमति जताई है। दो स्थायी कर्मचारी इस मसले पर कुछ नहीं कह रहे हैं। प्रबंधन को कर्मचारियों के इस निर्णय से अवगत करा दिया गया है। प्रबंधन ने इस मसले पर निर्णय लेने के लिए दो-तीन दिन का समय मांगा है।
- सियाराम, सहायक श्रमायुक्त
इन कर्मचारियों ने आत्मदाह की कोशिश की है। ऐसे में इन्हें बाहर रखना खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए उन्हें जेल भेज दिया गया है।
- अभय मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट