कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने मंगलवार को कहा कि अगर संसद से ' 'एक देश, एक चुनाव' बिल पास भी हो जाता है, तो भी 2029 में एक साथ चुनाव कराना संभव नहीं होगा।
चिदंबरम ने क्या कहा?
पब्लिक पॉलिसी संस्थानों ने क्या सुझाव दिए हैं?
इस बीच, 'एक देश, एक चुनाव' बिल की समीक्षा कर रही संसदीय समिति को सोमवार को विचार-विमर्श के दौरान कई सुझाव मिले। सूत्रों के अनुसार, दो पब्लिक पॉलिसी संस्थानों ने सुझाव दिया कि राज्य विधानसभा चुनावों को टालने के लिए मनमाने फैसलों की जगह तय और कानूनी रूप से जांचे जा सकने वाले आधार होने चाहिए। इसके साथ ही इसके लिए समय-सीमा भी निश्चित होनी चाहिए।
क्या है एक देश, एक चुनाव बिल?
संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024, 'एक देश, एक चुनाव के नाम से प्रस्तावित सुधार से जुड़ा है, जिसका मकसद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना है। केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 भी उस बड़े ढांचे का हिस्सा है, जिसका मकसद पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
यह बिल 17 दिसंबर, 2024 को लोकसभा में पेश किए गए। वहीं, आगे की जांच के लिए जेपीसी को भेजे गए इन बिलों का मकसद पूरे देश में एक साथ चुनाव कराना है।
संविधान (129वां संशोधन) बिल, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2024 पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने कई स्टडी विजिट की हैं। अलग-अलग विषयों के जानकारों के साथ बैठकें की हैं। सबसे हालिया स्टडी विजिट प्रोग्राम जुलाई में उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था।