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Crime: अनुसूचित जनजातियों पर बढ़ा अत्याचार, बलात्कार, हत्या, किडनेप और चोट झेल रहे एसटी समुदाय के लोग

सार

Crime: केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने बुधवार को राज्यसभा में डेरेक ओ ब्रायन द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है।
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अपराध - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में अनुसूचित जनजाति के लोगों पर होने वाले अत्याचार के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। पांच साल के दौरान अनुसूचित जनजातियों पर हो रहे अपराधों की संख्या छह हजार से 10 हजार के पार पहुंच गई है। इन अपराधों में इस समुदाय की महिलाओं से बलात्कार, चोट पहुंचाना, महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उन पर हमला करना, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, दंगे और किडनेपिंग आदि शामिल है। आपराधिक धमकी के केस भी बढ़े हैं। इसके अलावा आईपीसी के तहत आने वाले अपराधों में भी बढ़ोतरी हुई है।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने बुधवार को राज्यसभा में डेरेक ओ ब्रायन द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है। कुमार ने 'क्राइम इन इंडिया' रिपोर्ट के हवाले से बताया, 2018 से 2022 के बीच में अनुसूचित जनजाति के विरूद्ध अपराध/अत्याचार के तहत मामले बढ़े हैं। 2018 में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत 6178 मामले दर्ज किए गए थे। 2018 में ऐसे केसों की संख्या 6178, 2019 में 7135, 2020 में 7891, 2021 में 8475 और 2022 में 9735 रही है। हत्या के केसों की बात करें तो 2019 में ऐसे मामलों की संख्या 168 थी, वहीं 2022 में यह आंकड़ा 217 पर पहुंच गया। 
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हत्या का प्रयास, ऐसे केसों की संख्या 2018 में 131 थी, जो 2022 में 258 हो गई। साधारण चोट, इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 2018 में ऐसे केसों की संख्या 1429, 2019 में 1674, 2020 में 2247, 2021 में 2358 और 2022 में 2826 रही है। गंभीर चोट के केस भी उक्त अवधि में 104 से 155 हो गए हैं। महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उन पर हमला, 2018 में ऐसे केसों की संख्या 857, 2019 में 886, 2020 में 885, 2021 में 881 और 2022 में 1022 रही है। 

किडनेपिंग और अपहरण, 2018 में ऐसे केसों की संख्या 116, 2019 में 141, 2020 में 148, 2021 में 134 और 2022 में 140 रही है। अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के साथ बलात्कार, ये मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। 2018 में ऐसे केसों की संख्या 1008, 2019 में 1083, 2020 में 1137, 2021 में 1324 और 2022 में 1347 रही है। दंगों की संख्या 2018 में 189 थी, 2022 में 163 हो गई है। आपराधिक धमकी का ग्राफ भी बढ़ गया है। 
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2018 में 484 केस थे, 2022 में इनकी संख्या 567 हो गए
अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लोगों की भूमि पर कब्जा करना या निपटान करना, ऐसे केसों की संख्या 2018 में 18 थी, जबकि 2022 में 41 हो गई है। निवास स्थान छोड़ने के लिए मजबूर करना/सामाजिक बहिष्कार, ऐसे मामले 2018 में 19 थे, 2019 में 34, 2020 में 28, 2021 में 24 और 2022 में 19 रहे हैं। अन्य अपराधों की बात करें तो 2018 में इनकी संख्या 193, 2019 में 241, 2020 में 199, 2021 में 171 और 2022 में 138 रही है। 
 
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