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तमिलनाडु में ईसाइयों पर अत्याचार का शोर, RSS पर लगाया गया आरोप

Sat, 28 Apr 2018 04:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
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तमिलनाडु में ईसाई समुदाय डरा हुआ महसूस कर रहा है। सोशल मीडिया पर इस तरह की खबरें तेजी से वायरल हो रही हैं। कुछ ऐसे बयान भी ट्वीट किए गए हैं जिनमें भेदभाव और जातीय हिंसा का आरोप लगाया जा रहा है। तमिलनाडु में ईसाइयों पर अत्याचार की बातें पहले भी उठाई गईं हैं। इसमें ईसाई धर्मगुरुओं पर होने वाले अत्याचारों को भी निशाना बनाया जाता रहा है। इन घटनाओं के पीछे कुछ लोग आरएसएस संगठन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। 

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सवाल यह है कि भारत में जिस जाति उत्पीड़ने से त्रस्त होकर शोषण मुक्ति की चाह में लोगों ने ईसाई धर्म अपनाया था वो संकट में पड़ गया है। न तो इनका कोई आर्थिक उत्थान दिखाई दे रहा है और न ही इन्हें जातिवाद के कलंक से छुटकारा मिला है। आरोपों के मुताबिक चर्च में दलित ईसाईयों से गैर-बराबरी का यह आलम है कि दलितों के लिए बैठने का अलग स्थान, पीने के लिए पानी का अलग गिलास दफन करने के लिए कब्रिस्तान भी अलग है। बता दें कि आरोप है कि भारत में ईसाई धर्म की शुरुआत ही गैर-बराबरी की नींव पर हुई।  

ईसाई धर्म दो वर्गों में बंटा हुआ देखा जा सकता है। एक तरफ संपन्न वर्ग है जो उच्च जाति से आया है जिसने अधिकांश उच्च पदों और संसाधनों पर कब्जा कर रखा है। तो दूसरी ओर दलित वर्ग से धर्मांतरण कर ईसाई बने लोगों का तबका है जो इस उम्मीद में ईसाई बने थे कि ऐसा करके उन्हें हिन्दू जाति व्यवस्था के दुर्गुणों से मु्क्ति मिल जाएगी। 
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चेन्नई से 60 किलोमीटर दूर चेंगलपट्टू  जिले के केकेपुड्डुर गांव में ढाई हजार ईसाई रहते हैं। इसमें दलित ईसाईयों की तादात 1500 है। इस पूरी कैथोलिक आबादी पर नायडू व रेड्डी जाति से धर्म परिवर्तन करके आये लोगों का कब्जा है। वह चर्च से लेकर कब्रिस्तान तक भेदभाव को बनाये रखते हैं और हर ईसाई त्यौहार पर इन दलितों का दोयम दर्जा कायम रहता है।

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