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Atal Tunnel: मील का पत्थर साबित हो रही यह सुरंग, सीएम जयराम ने बताया कैसे हुई 'जवान और किसान' की राह आसान

Sat, 27 Aug 2022 04:46 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, हिमाचल प्रदेश से लौट कर

सार

Atal Tunnel: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अमर उजाला डॉट कॉम के साथ बातचीत में कहा, इस टनल ने राज्य के एक क्षेत्र के लोगों का जीवन आसान बना दिया है। जब यह टनल नहीं थी तो यहां के लोग पांच छह महीने तक बर्फ में ही फंसे रहते थे।  बर्फबारी खत्म होने के बाद भी यहां के लोगों को कुल्लू तक जाने में पांच से सात घंटे लग जाते थे...
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Atal Tunnel - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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देवभूमि हिमाचल प्रदेश के रोहतांग में बनी 'अटल' टनल, अब मील का पत्थर साबित हो रही है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर कहते हैं, इस टनल से न केवल हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की एक नई राह खुली है, बल्कि यहां के लोगों का जीवन भी सहज हो गया है। इस टनल ने 'किसान और जवान', दोनों की राह आसान कर दी है। सैन्य सामग्री की आपूर्ति या जवानों की आवाजाही में अटल टनल से बड़ी मदद मिल रही है। लाहौल-स्पीति का संपर्क, जो लगभग आधे साल तक देश से कटा रहता था, अब इस टनल के चलते जनजातीय क्षेत्र के लोग किसी भी मौसम में कहीं पर आवाजाही कर सकते हैं। किसानों के उत्पाद अब फटाफट मंडी तक पहुंच जाते हैं। इस क्षेत्र में अब पर्यटन की नई संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

टनल ने क्षेत्र के लोगों का जीवन आसान बनाया

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अमर उजाला डॉट कॉम के साथ बातचीत में कहा, इस टनल ने राज्य के एक क्षेत्र के लोगों का जीवन आसान बना दिया है। जब यह टनल नहीं थी तो यहां के लोग पांच छह महीने तक बर्फ में ही फंसे रहते थे। वे चाह कर भी कहीं नहीं जा सकते थे। बर्फबारी खत्म होने के बाद भी यहां के लोगों को कुल्लू तक जाने में पांच से सात घंटे लग जाते थे। बरसात में लैंड स्लाइड या भूस्खलन होने के कारण यह समय और आगे सरक जाता था। अटल टनल के बाद अब वे तमाम दिक्कतें खत्म हो गई हैं। सैन्य बलों को भी अब पूरे वर्ष सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए आवाजाही की सुविधा मिल रही है। मनाली-लेह-लद्दाख सड़क मार्ग को सुरक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

अब किसानों की सब्जियां खराब होने का डर नहीं

मुख्यमंत्री जयराम ने कहा, लिहाजा ये टनल सालभर चलती रहती है, इसलिए अब कितना भी खराब मौसम हो, लाहौल-स्पीति के लोग हिमाचल प्रदेश के दूसरे हिस्सों से जुड़े रहते हैं। इस इलाके में सब्जियां खूब होती हैं। पहले यहां के किसानों को यह शिकायत रहती थी कि उनकी ताजी सब्जी, मंडी तक पहुंचते-पहुंचते बासी हो जाती हैं। अगर कहीं पर लैंड स्लाइड के चलते जाम लगा है तो सब्जियों के खराब होने की आशंका बनी रहती थी। 9.02 किलोमीटर लंबी अटल टनल से अब लाहौल-स्पीति घाटी के किसानों को बड़ा फायदा हुआ है। वे आसानी से अपने उत्पाद, दूसरे जिलों की मंडियों तक पहुंचा रहे हैं। आलू, मटर व ब्रोकली जैसी कई सब्जियां अब तय समय पर मंडियों में पहुंचती हैं। टनल बनने से यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। मनाली आने वाले अधिकांश पर्यटक अब अटल टनल को देखने जाते हैं। वहां से वे पर्यटक, लाहौल-स्पीति घाटी में पहुंच रहे हैं।

वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है अटल टनल का नाम

रोहतांग में बनी अटल टनल को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान दिया गया है। दस हजार फुट की ऊंचाई पर बनी इस टनल की लंबाई 9.02 किलोमीटर है। यह ट्रैफिक टनल, दुनिया में सबसे ऊंची और सबसे लंबी है। प्रधानमंत्री मोदी ने अक्तूबर 2020 में इस टनल का उद्घाटन किया था। कोरोना संक्रमण के दौरान भी टनल का काम तेजी से चलता रहा। इस टनल के चलते मनाली से लेह-लद्दाख का सफर 46 किलोमीटर कम हो गया है। टनल में बहुत कम दूरी पर आग बुझाने के यंत्र, सीसीटीवी कैमरे, एक्सीडेंट की सूचना देने के लिए आटोमेटिक सिस्टम, पांच सौ मीटर पर एक आपातकालीन निकास और हवा की गुणवत्ता जांचने वाले उपकरण लगाए गए हैं। टनल का निर्माण 2010 में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के मार्गदर्शन में शुरू किया गया था। टनल में जब मनाली की तरफ से प्रवेश करते हैं तो वहां के प्रवेश द्वार को कुल्लवी शैली में बनाया गया है, जबकि लाहौल की ओर का प्रवेश द्वार बौद्ध शैली पर आधारित है।

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