प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अटल टनल का उद्घाटन कर दिया है। नौ किलोमीटर लंबी इस टनल के जरिए लेह-लद्दाख में सरहद तक पहुंचने के लिए 46 किलोमीटर का सफर कम हो जाएगा। यह टनल चीन और पाकिस्तान, दोनों के लिए कड़ा संदेश है। इस टनल से भारतीय सेना को सामरिक रुप से मजबूती मिलेगी। सेना और साजो-सामान त्वरित गति से बॉर्डर तक पहुंचेगा। पाकिस्तान से सटे कारगिल तक पहुंचने की राह भी अब सुगम और तेज हो जाएगी।
बर्फबारी के कारण सदियों से देश के बाकी हिस्सों से कटे रहने वाले लाहौल-स्पीति घाटी के इलाकों की तकदीर बदलने जा रही है। यह टनल यहां कई तरह के नए बदलावों की गवाह बनेगी। अटल सुरंग स्थल पर काम कर चुके कर्नल सूरजपाल सिंह सांगवान बताते हैं कि लाहौल-स्पीति घाटी और मनाली-लेह रूट पर लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत फूलने वाली मिट्टी की है। बर्फ के बाद जब सूर्य की किरणें पड़ती हैं तो मिट्टी फूलती है और सड़कें टूट जाती हैं। विपरीत परिस्थितियों में हेलीकॉप्टर सेवा का इस्तेमाल करना पड़ता है। हालांकि वह जोखिम भरा रहता है। वजह, मौसम और परिस्थितियां उसके अनुकूल नहीं होती। रोहतांग से आगे सड़क टूटी हुई मिलती है। सड़कों पर बहुत ज्यादा फिसलन होती है। इससे सड़क हादसा होने का खतरा मंडराता रहता है। अब इन सब दिक्कतों से छुटकारा मिल जाएगा।
कर्नल सूरजपाल सिंह सांगवान जो अब जम्मू-कश्मीर में एनएचआईडीसीएल पीएमयू अखनूर के प्रोजेक्ट पर बतौर जीएम (पी) कार्यरत हैं, उनका कहना है कि अटल टनल को कई फायदों से देखा जाना चाहिए। इसमें कोई दो राय नहीं है कि चीन और पाकिस्तान आज परेशान हो रहे हैं। हमारे सैन्य बलों के लिए ये टनल बड़ी मददगार साबित होगी। खासतौर पर, लद्दाख बॉर्डर और कारगिल जैसे स्थानों पर सड़क मार्ग के जरिए सैन्य बल तेजी से आवाजाही कर सकेंगे। चीन के साथ जारी मौजूदा टकराहट में अब ये जरूरी हो गया है कि बॉर्डर तक जाने वाला जमीनी रूट क्लीयर और सुरक्षित हो। टनल से भारत को सामरिक फायदा तो मिलेगा ही, साथ ही लाहौल-स्पीति घाटी के इलाके अब सर्दियों में बर्फबारी के चलते बाकी दुनिया से छह माह तक नहीं कटेंगे। अटल टनल की मदद से अब सभी मौसम में लाहौल और स्पीति घाटी में सुदूर क्षेत्रों तक आवागमन हो सकेगा।
इस तरह बदलेगी लाहौल-स्पीति घाटी की तकदीर
कर्नल सूरजपाल सिंह सांगवान के मुताबिक लाहौल-स्पीति घाटी का केलांग और दूसरे इलाके पांच छह महीने ही खुल पाते हैं। बर्फबारी के कारण छह माह तक ये देश के दूसरे भागों से कट जाते हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां के लोग किस तरह का कठोर जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इन इलाकों में जमीन खेती के लायक है। यहां उच्च गुणवत्ता के सेब का उत्पादन होता है। जमीन उपजाऊ है, लेकिन सालभर कामकाज नहीं हो पाता।
अब टनल के चालू होने के कारण यहां का जीवन बदल जाएगा। युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में सालभर काम मिलेगा। किसान अपनी फसल को सड़क मार्ग खुलने के इंतजार में बचाकर नहीं रखेगा। वह सड़क मार्ग के जरिए उसे मनाली या दूसरे भागों तक पहुंचा सकता है। युवाओं को नौकरी के पीछे नहीं भागना पड़ेगा। होटल इंडस्ट्री से लेकर पर्यटन से जुड़े अनेक कामकाज यहां शुरू हो सकेंगे।