पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथा अंतिम संस्कार किया गया। दिल्ली के राजघाट स्थित स्मृति स्थल पर पूरे देश ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी। वाजपेयी द्वारा गोद ली गई बेटी नमिता भट्टाचार्य ने उन्हें मुखाग्नि दी।
भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और उनके घनिष्ठ मित्र ने उनके निधन पर शोक व्यक्त प्रकट किया है।
उन्होंने कहा है कि 'हमने दशकों तक साथ काम किया है। मित्र, सहयोगी के अलावा मैं और अटल जी एक-दूसरे के भावों को अच्छी तरह समझते थे। अटल जी, दीन दयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बहुत करीब रहे थे। इनके बाद अटल जी ने बहुत ही प्रभावशाली तरीके से आरएसएस की विचारधारा को आगे बढ़ाया। पार्टी के सिद्धांतों को लेकर वे मुख्य चेहरा बने। वे बखूबी जानते थे कि संघ के विचारों को कब और कैसे आगे बढ़ाना है। लोग विचारधारा को स्वीकार्य करेंगे या नहीं, अटल जी यह सब बहुत करीब से जानते थे।'
उन्होंने आगे कहा 'बड़ी बात यह थी कि लोगों ने अटल जी की बात को न केवल सुना, बल्कि उनकी विचारधारा को भी स्वीकार कर लिया। जहां तक प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवारी की बात थी तो उनसे बेहतर कोई दूसरा व्यक्ति था ही नहीं। मैंने संगठन के लिए खूब काम किया है। मैं संगठन के लिए ही ज्यादा उपयुक्त था। जब बात देश का नेतृत्व करने की आई तो अटल जी उसके लिए हर तरीके से उपयुक्त थे।'
भाजपा नेता ने कहा 'पार्टी ने भी यह सोच रखा था कि जब कभी हम सरकार बनाने में सक्षम होंगे या उसके करीब होंगे, तो अटल बिहारी वाजपेयी ही हमारे नेता होंगे। पार्टी में नम्बर एक-दो पर कौन है, कौन नहीं है, ऐसी कोई बात नहीं थी। किसी भी नेता के लिए लोकप्रियता का कम-ज्यादा होना अलग बात है। बड़ा मुद्दा यह होता है कि लोगों द्वारा किसी नेता की स्वीकार्यता कितनी है। इस मामले में अटल जी का कोई सानी नहीं था।'