कावेरी जल विवाद का मुद्दा करीब एक सौ 18 साल से अधिक पुराना है। तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी जी ने ही अपने कार्यकाल में इस विवाद के समाधान की पहल की थी। साफ्टवेयर विकास के लिए प्रोद्यौगिकी कार्यदल का गठन किया था। विद्युतीकरण में गति लाने के लिए वाजपेयी जी की सरकार ने ही केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग की स्थापना की। वह प्रधानमंत्री वाजपेयी ही थे, जिनकी सरकार ने राजमार्ग के विकास के साथ-साथ देश में हवाई अड्डे के विकास तथा इसकी जरूरत पर जोर दिया था।
कोंकण रेलवे की शुरूआत भी अटल जी के समय में हुई थी। आज कोंकण रेलवे अपनी सफलता के नए मुकाम बना रहा है। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय में ही देश में व्यापार एवं उद्योग समिति का गठन हुआ।
बुलाया मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन
दलगत विचारधारा से ऊपर उठकर देश हित में सोचने का जज्बा अटल बिहारी वाजपेयी में था। वह देश के प्रधानमंत्री थे और मंहगाई बढ़ रही थी। अटल जी ने इस समस्या के समाधान के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मिलकर परस्पर सहयोग और क्रियान्वयन की नीति को आगे बढ़ाया।
दिल्ली में राज्यों के मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन आयोजित किया गया। उड़ीसा के साथ सबसे गरीब क्षेत्रों की पहचान भी उनके समय में की गई। इन क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन के कार्यक्रम को लागू करने की पहल हुई।
महानगरों में अतिक्रमण, अवैध निर्माण जैसा चलन बढ़ने पर अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इस तरफ भी अपनी सक्रियता दिखाई। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार अर्बन सीलिंग एक्ट को संसद की मंजूरी दिलाई। इस कानून के पारित होने के बाद दिल्ली जैसे महानगर को आने वाले समय की तमाम परेशानियों से मुक्त किया जा सका।
सच में हार नहीं मानते थे
अटल जी हार नहीं मानते थे। अटल जी के जमाने में विदेश सचिव रहे शशांक के अनुसार परमाणु परीक्षण का निर्णय हो या पाकिस्तान, चीन के साथ संबंध हमारे तत्कालीन प्रधानमंत्री की कुंडली में हार मानना लिखा ही नहीं था।
वह जिस तरह से पाकिस्तान के साथ रिश्तों पर जमी बर्फ को हटाने के लिए पहल किए, बस से लाहौर गए और फिर कारगिल युद्ध हुआ और फिर राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के साथ वार्ता की पहल का दु:साहस दिखाया, कोई आसान घटना नहीं है। 2003 में संघर्ष विराम समझौता और पाकिस्तान की सीमा से भारत में आतंकियों की घुसपैठ रोकने का समझौता कोई सामान्य बात नहीं है।