आपातकाल के दौरान जब सोमनाथ ने नवीकरण के लिए अपना पासपोर्ट विदेश मंत्रालय में जमा कराया तो पासपोर्ट उन्हें वापस नहीं किया गया। तब विदेश जाने के इच्छुक सोमनाथ ने पश्चिम बंगाल के तत्कालीन सीएम सिद्घार्थशंकर राय से कई बार गुहार लगाई, लेकिन बात नहीं बनी।
1977 में सत्ता परिवर्तन के बाद जब वाजपेयी विदेश मंत्री बने तो सोमनाथ ने उन्हें आपबीती सुनाई। तब वाजपेयी के निर्देश पर मंत्रालय का एक अधिकारी उसी शाम पासपोर्ट पहुंचाने चटर्जी के घर पहुंचा।
अटल को टोकने पर लालू से नाराज हो गए चटर्जी
2002 के गोधराकांड पर 2005 में लोकसभा में तब भारी हंगामा हुआ जब तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने इसके लिए संघ को जिम्मेदार ठहराया। इस पर वाजपेयी कुछ बोलना चाहते थे, लेकिन उनके भाषण के बीच लालू उन्हें बार-बार टोक रहे थे। इससे खफा चटर्जी ने लालू को सख्त लहजे में वाजपेयी के भाषण के दौरान टोका-टोकी नहीं करने की हिदायत दी।
एक साथ हारे चुनाव
दिलचस्प संयोग है कि वाजपेयी और चटर्जी दस-दस बार सांसद रहे। दोनों ने एक साथ राजनीति को अलविदा कहा। 1984 के आम चुनाव में इंदिरा गांधी की मौत के बाद चली सहानुभूति लहर में दोनों नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। बोलपुर संसदीय क्षेत्र से चटर्जी को पहली बार पश्चिम बंगाल की वर्तमान सीएम ममता बनर्जी के हाथों शिकस्त मिली तो ग्वालियर में वाजपेयी दिवंगत माधवराव सिंधिया से चुनाव हार गए।