पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन गुरुवार की शाम 5 बजकर 5 मिनट पर दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में हो गया। शुक्रवार को वह पंचतत्व में विलीन हो गए। उनका अंतिम संस्कार राष्ट्रीय स्मृति स्थल में किया गया जो कि राजघाट के पास ही स्थित है। यहीं पर उनकी समाधि भी बनाई जाएगी। अगर लालकृष्ण आडवाणी के साथ की बात करें तो दोनों का साथ बरसों पुराना है। भारत की राजनीति में दोनों साथ-साथ चले हैं। वाजपेयी के निधन से लालकृष्ण आडवाणी बेहद दुखी हैं।
मीडिया ने मुझे बनाया कट्टर हिंदू और अटल जी को उदार
अयोध्या में राम रथयात्रा पर आडवाणी कहते हैं कि रथयात्रा के मीडिया ने अटल जी को उदार बना दिया और मुझे कट्टर हिंदू। उन्होंने कहा कि 1990 में अयोध्या आंदोलन के लिए समर्थन जुटाने के लिए मैंने राम रथयात्रा शुरू की। जिसके बाद मीडिया ने अटल जी को उदार बना दिया और मुझे कट्टर हिंदू। शुरू में तो मुझे इससे दुख हुआ क्योंकि यह वास्तविकता से बिल्कुल उल्ट था।
जब अटल जी को मैंने ही प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया
आडवाणी आगे कहते हैं कि 1995 के पार्टी के मुंबई अधिवेशन में भी ऐसा ही संदेश निकला, जब मैं पार्टी अध्यक्ष था तो मैंने उसी के नाते अटलजी को पार्टी का प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया। इस पर पार्टी और संघ के लोग मुझे ऐसा करने पर झिड़कने लगे। लोगों ने कहा कि सरकार चलाने के लिए आप ही बेहतर होंगे। तब मैंने कहा कि मैं इससे सहमत नहीं हूं मैं तो जनता की नजरों में जननायक की तुलना में विचारक हूं। अटल जी ही नायक हैं।