सोमवार को छत्तीसगढ़ में वोटिंग
सोमवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण के साथ ही पांच राज्यों में शुरू हो रहे विधानसभा चुनाव को अगले साल के लोकसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा है। ये विधानसभा चुनाव तय करेंगे कि भाजपा, कांग्रेस, बसपा जैसे प्रमुख राजनीतिक दल 2019 के आम चुनाव में मुकाबला करने के लिए किस तरह सियासी समीकरण बनाएंगे। राजनीतिक दल छत्तीसगढ़ की 90, मध्यमप्रदेश की 230, मिजोरम की 40, राजस्थान की 200 और तेलंगाना की 119 सीटों के लिए जोर आजमाएंगे।
अगर कांग्रेस इन विधानसभा चुनावों में अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी भाजपा का खेल बिगाड़ने में सफल रहती है तो यह लोकसभा चुनाव से पहले उसके लिए मनोबल बढ़ाने वाला कदम होगा। उधर, अच्छा प्रदर्शन करने पर भाजपा अपने कार्यकर्ताओं में नया जोश भर पाएगी और 2019 के चुनाव में केंद्र में अपनी सत्ता बचाए रखने की अपनी उम्मीद को बल देगी। भाजपा ने 2013 में हिंदी-भाषी राज्यों - मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में 165,163 और 49 सीटें जीती थीं और कांग्रेस 58, 21, और 39 सीटों में सिमट गई थी।
तेलंगाना में मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की अगुवाई वाली सत्तारुढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति को सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत के रुप में देखा जा रहा है और उसका मुकाबला कांग्रेस और भाजपा से होगा। 2014 के विधानसभा चुनाव में 63 सीटों पर जीती टीआरएस में बाद के सालों में विरोधी दलों के कई नेता शामिल हो गये। बहरहाल, सत्ताविरोधी लहर और केसीआर द्वारा समय से पहले चुनाव कराने से चौंकाने वाली बातें सामने आ सकती हैं। मिजोरम में कांग्रेस 2008 से सत्तासीन है जबकि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में भाजपा पिछले 15 सालों से शासन कर रही है।