कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते संक्रमण के बीच हुए चुनाव के बाद अब नतीजे कांग्रेस के लिए कतई अच्छे नहीं रहे हैं। भले ही कांग्रेस इस बात पर जश्न मना ले कि ममता बनर्जी ने भाजपा का रथ थाम लिया है, लेकिन उसके खुद के लिए चुनाव परिणाम बेहद निराशाजनक हैं। उसकी स्थिति पहले से भी अधिक खराब हुई है। थोड़ी बहुत राहत उसे तमिलनाडु में ही मिली है जहां डीमके सत्ता में वापसी करने जा रही है। आइए जानते हैं किस राज्य में कांग्रेस की कैसी हालत रही।
प. बंगाल में बुरा हाल
कांग्रेस के बंगाल में बुरा हाल हुआ है। ऐसी दुर्गति की कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। खुद उसके लिए ये परिणाम एक दु:स्वपन ही साबित हुआ है। काफी ना-नुकुर के बाद उसने बंगाल में वाम मोर्चे के साथ गठबंधन तो किया, लेकिन परिणाम बता रहे हैं कि उसके लिए ये फैसला फायदेमंद नहीं रहा। अब तक के नतीजे व रुझान बता रहे हैं कि उसका स्कोर शून्य है। चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने राज्य में खासा प्रचार किया था, भाजपा और टीएमसी दोनों को निशाने पर लिया, लेकिन उनकी मेहनत काम नहीं आई।
केरल में निराशा
कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका केरल में रहा। इस राज्य में हर पांच साल में सत्ता बदलती रही है। लेकिन इस बार ये नियम टूट गया। सत्तारूढ़ एलडीएफ दोबारा सत्ता हासिल करने जा रही है। पार्टी को अब तक 100 सीटों पर बढ़त या जीत हासिल हो चुकी है। यूडीएल 38 पर जाकर अटक गई है। कांग्रेस ने यूडीएफ के साथ गठबंधन किया था, लेकिन इसका फायदा बिल्कुल नहीं मिला। सीएम पिनरई विजयन की छवि और कामकाज के आगे विपक्षी यूडीएफ गठबंधन बेअसर साबित हुआ।
पुडुचेरी में भी हार की तरफ
कांग्रेस को पुडुचेरी में भी हार मिलती दिख रही है। यहां कुछ महीने पहले ही कांग्रेस की सरकार गिर गई थी। उसके कई विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया था। ऐसा लगा था कि इसका फायदा चुनाव में कांग्रेस को जरूर मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एनडीए गठबंधन ही अब तक के परिणामों व रुझानों में बढ़त बनाए हुए है। पिछले दिनों ही नारायणसामी सरकार ने अपना विश्वास मत खो दिया था और पुडुचेरी में राष्ट्रपति शासन लग गया था। इसके बाद कांग्रेस और पूर्व सीएम नारायणसामी ने भाजपा पर जमकर हमला बोला, लेकिन मतदाताओं ने उन्हें नकार दिया।
असम में भी नहीं हुई वापसी
कांग्रेस को इस चुनाव में असम से बहुत आस थी। उसका मानना था कि इस बार वह बदरूद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन बनाकर चुनावी मैदान में उतरी लेकिन इसका फायदा होता नहीं दिख रहा है। अब तक के रुझान और परिणाम बता रहे हैं कि महाजोत गठबंधन अपना असर नहीं दिखा पाया है। भाजपा गठबंधन दोबारा सत्ता हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। इस बार कांग्रेस पर सांप्रदायिक पार्टी से गठबंधन करने का आरोप लगा था, भाजपा ने इसे लेकर आक्रामक प्रचार भी किया जिसका फायदा शायद उसे मिला है। कभी असम पर एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस आज सत्ता में वापसी के लिए संघर्ष करती दिख रही है।
तमिलनाडु में थोड़ी राहत
कांग्रेस को सिर्फ तमिलनाडु में ही थोड़ी राहत मिलती दिख रही है, वो भी डीएमके की बदौलत। डीएमके सत्ता में वापसी करने जा रही है। कई दौर की बातचीत के बाद डीएमके ने कांग्रेस को महज 25 सीटें ही दी थीं। कांग्रेस को भले ही कम सीटें मिली, लेकिन उसका ये फैसला आखिर सही साबित हुआ। सत्ताधारी एआईडीएमके के खिलाफ सत्ताविरोधी लहर का फायदा डीएमके गठबंधन को मिला। इस राज्य में हर पांच साल में सत्ता बदलने का इतिहास रहा है। ये सिलसिला इस बार भी बरकरार रहा।