विधानसभा में कहीं जीती रिश्तेदार, कहीं हारे।
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चार राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और एक केंद्र शासित प्रदेश- पुदुचेरी में 4 मई मतगणना का दिन है। इसी के साथ साफ हो जाएगा कि इन राज्यों में नई सरकार किसकी होगी। कई राज्यों में तो राजनीतिक दलों ने अपने कद्दावर नेताओं के परिवारवालों को भी टिकट दिया है। कुछ सीटों पर परिवारों की पुरानी हनक बरकरार रखने के लिए उनके परिजनों को टिकट दिए गए हैं, ताकि वे अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा सकें। ऐसी भी सीटें हैं जहां परिवार के ही दो लोग आमने-सामने हैं। विरासत की इस जंग में कौन जीतेगा किसे हार मिलेगी ये भी आज तय हो जाएगा। आइये जानते हैं ऐसी ही सीटों के बारे में…
1. तमिलनाडु
स्टालिन परिवार: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इस बार पार्टी का गढ़ मानी जाने वाली कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र से टीवीके उम्मीदवार वीएस बाबू के खिलाफ 8795 वोट से हार गए।
वहीं, उनके बेटे और उप-मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी सीट से जीत दर्ज करने में सफल रहे। उन्होंने करीबी मुकाबले में टीवीके के डी. सेल्वम को 7140 वोटों से हराया। गौरतलब है कि अपने पिता एमके स्टालिन के बाद उदयनिधि राज्य की राजनीति में दूसरे सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के रूप में उभरे। जहां 2022 में स्टालिन कैबिनेट में उन्हें मंत्री पद मिला तो वहीं 2024 में उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाने का एलान किया गया।
कार्तिक मोहन: द्रमुक विधायक एमके. मोहन के बेटे कार्तिक इस बार विल्लिवक्कम सीट से विजय की तमिलगा वेत्री कझगम के उम्मीदवार आधव अर्जुन के खिलाफ 17302 वोटों से हार गए। कार्तिक मोहन तमिलनाडु के सबसे अमीर प्रत्याशियों में से हैं। उनके हलफनामे में संपत्ति 346 करोड़ से ज्यादा घोषित की गई है। उनके पिता एमके मोहन 2021 में अन्ना नगर विधानसभा सीट से चुनाव जीते थे।
सौम्या अंबुमणि: पत्तली मक्कल काची (पीएमके) नेता अंबुमणि रामदास की पत्नी सौम्या इस बार धर्मपुरी सीट से चुनाव जीत गईं। उन्होंने टीवीके के शिवन एम. को 20,896 वोटों से हराया। उनके पति अंबुमणि रामदास एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं और फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं।
पोरकोडी आर्मस्ट्रांग: दिवंगत बसपा नेता के. आर्मस्ट्रांग की पत्नी पोरकोडी इस बार अन्नाद्रमुक के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरी। के. आर्मस्ट्रांग तमिलनाडु के एक सक्रिय दलित और अंबेडकरवादी नेता रहे, जिनकी जुलाई 2024 में हत्या कर दी गई थी। हालांकि, वे तीसरे स्थान पर रहीं। अगर उन्हें मिले वोटों पर नजर डाली जाए तो साफ है कि द्रमुक नेता केएस. रविचंद्रन को टीवीके के खिलाफ 22,333 वोटों से हार मिली है, जबकि पोरकोडी को 23,304 वोट हासिल हुए। यानी वे डीएमकी की हार का एक बड़ा कारण बनीं।
प्रेमलता विजयकांत: देशीय मुरपोक्कु द्रविड़ कझगम (डीएमडीके) के संस्थापक कैप्टन विजयकांत की पत्नी प्रेमलता इस बार विरुधाचलम सीट से जीत दर्ज करने में सफल रहीं। उन्होंने करीबी मुकाबले में टीवीके के विजय एस. को 2387 वोटों से शिकस्त दी। 2006 में इसी सीट से कैप्टन विजयकांत ने अपनी पहली जीत हासिल की थी। प्रेमलता की पार्टी ने इस बार द्रमुक के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा।
राजा अन्बजगन: तमिलनाडु के पूर्व मंत्री जयरमन अन्बजगन के बेटे राजा इस बार त्यागराजनगर सीट से द्रमुक के टिकट पर उतरे थे। हालांकि, वे टीवीके और अन्नाद्रमुक के बाद तीसरे स्थान पर रहे। राजा के पिता जयरमन द्रमुक के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे और वे उस चेपॉक सीट से 2011 से 2020 तक विधायक रहे, जिस पर बाद में उदयनिधि स्टालिन ने चुनाव जीता।
2. केरल
पी.ए. मोहम्मद रियास: मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के दामाद और मौजूदा मंत्री, बेपोर सीट से एक बार फिर चुनाव जीते हैं। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार पीवी अनवर को 7487 वोटों से हरा दिया। सीएम विजयन की बेटी वीणा, रियास की पत्नी हैं। रियास इससे पहले 2021 में भी बेपोर से माकपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। वे विजयन सरकार में पीडब्ल्यूडी और अन्य विभागों के मंत्री भी हैं।
चांडी ओमन: केरल के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय ओमन चांडी के बेटे, अपने पिता की पारंपरिक सीट पुथुपल्ली सीट से जीत हासिल करने में सफल रहे। उन्हें इस बार कांग्रेस ने टिकट दिया। उन्होंने अपनी इस सीट को सुरक्षित करते हुए माकपा के केएम. राधाकृष्णन को 52,907 वोटों से हरा दिया। वे पेशे से वकील हैं और 2016 से सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहे हैं।
जोस के. मणि: दिवंगत दिग्गज नेता केएम. मणि के बेटे जोस इस बार पाला विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए। कांग्रेस से लड़ रहे जोस को निर्दलीय प्रत्याशी मणि सी. कप्पन ने 2991 वोटों से शिकस्त दी। जोस इससे पहले लोकसभा और राज्यसभा के सांसद भी रह चुके हैं। वहीं, उनके पिता केएम मणि केरल के सबसे लंबे समय तक विधायक रहने वाले नेता थे। वे पाला सीट से ही 1965 से लगातार 50 वर्ष तक विधायक रहे।
अप्पू जॉन जोसेफ: केरल कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री पीजे. जोसेफ के बेटे अप्पू जॉन जोसेफ इस बार पिता की ही सीट थोडुपुझा से चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल की। वे पेशे से इंजीनियर और कृषक हैं। अप्पू ने केरल कांग्रेस के सिरियाक चाझीकदन को 44,291 वोटों से हराया।
पद्मजा वेणुगोपाल: केरल के पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण की बेटी पद्मजा इस बार त्रिशूर सीट से चुनाव हार गईं। वे तीसरे स्थान पर रहींं। कांग्रेस की दिग्गज नेता रहीं पद्मजा का भाजपा के टिकट पर त्रिशूर से चुनाव लड़ना इस बार के सबसे चर्चित घटनाक्रमों में से एक रहा थआ। उनके पिता करुणाकरण ने 1970 से 1990 के दशक में चार बार केरल में सीएम की कुर्सी संभाली। वे केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ के शिल्पकार भी माने जाते हैं।
केएस. सबरीनादन: कांग्रेस के टिकट पर नेमोम से उतरे सबरीनादन केरल के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जी. कार्तिकेयन के बेटे हैं। उन्हें इस सीट से भाजपा के नेता राजीव चंद्रशेखर ने शिकस्त दी। वो कुल मिलाकर तीसरे स्थान पर रहे। दूसरे नंबर पर माकपा के वी. शिवनकुट्टी रहे, जिन्हें चंद्रशेखर से 4978 वोटों से हार मिली। नेमोम सीट इस बार केरल की राजनीति में एक हाई-प्रोफाइल सीट मानी जा रही थी।
शोन जॉर्ज: भाजपा नेता पीसी जॉर्ज के बेटे शोन इस बार पाला विधानसभा सीट से चुनाव हारकर तीसरे स्थान पर रहे। वे इस सीट पर कांग्रेस के लिए चुनौती पेश कर रहे थे। पीसी जॉर्ज का क्षेत्र में काफी प्रभाव रहा है और शोन उसे भाजपा के पक्ष में भुनाने की कोशिश में हैं।
3. पश्चिम बंगाल
सोमा ठाकुर (भाजपा) बनाम मधुपर्णा ठाकुर (टीएमसी): बंगाल की बगदाह सीट पर इस बार सबसे दिलचस्प मुकाबला रहां। यहां भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहीं सोमा ठाकुर ने टीएमसी नेता और मौजूदा विधायक मधुपर्णा ठाकुर को 34,616 वोट से हरा दिया। गौरतलब है कि दोनों ही नेता एक ही परिवार की हैं। जहां सोमा भाभी हैं तो वहीं मधुपर्णा उनकी ननद। ऐसे में इसे मतुआ समुदाय के ठाकुरबाड़ी परिवार का आंतरिक मुकाबला रहा। मधुपर्णा रिश्ते में केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर की बहन हैं। उधर शांतनु ठाकुर की पत्नी सोमा ठाकुर हैं।
सुब्रत ठाकुर: दूसरी तरफ गायघाट सीट से भाजपा के उम्मीदवार सुब्रत ठाकुर ने तृणमूल कांग्रेस से उतरे नरोत्तम बिस्वास को 47,683 वोटों से हरा दिया। सुब्रत ठाकुर असल में शांतनु ठाकुर के बडे़ भाई हैं। वे पूर्व मंत्री मंजुल कृष्ण ठाकुर के बेटे हैं। यह सीट मतुआ राजनीति का मुख्य केंद्र है।
शुभेंदु अधिकारी: बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर सीट से भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की। नंदीग्राम में उन्होंने अपने ही करीबी रहे टीएमसी के पवित्र कर को 9665 वोटों के अंतर से हराया। वहीं भवानीपुर में शुभेंदु ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15,105 वोट से हरा दिया। यह लगातार दूसरी बार है, जब शुभेंदु ने ममता बनर्जी को चुनाव में शिकस्त दी है।
शुभेंदु अधिकारी, जो कभी टीएमसी के कद्दावर नेता और ममता बनर्जी के करीबी थे, अब राज्य में विपक्ष के नेता हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी और भाई भी राजनीति के दिग्गज हैं।
तीर्थंकर घोष (टीएमसी): टीएमसी के कद्दावर नेता और विधायक निर्मल घोष के बेटे तीर्थंकर घोष को पानीहाटी सीट से हार मिली है। उन्हें इस सीट पर भाजपा की तरफ से उम्मीदवार बनाकर उतारी गईं आरजी कर अस्पताल कांड की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने 28,836 वोट से हरा दिया। उनका इस सीट से उतरना ही चुनाव को एक भावुक और राजनीतिक मुद्दा बना गया था।
दिब्येंदु अधिकारी: शुभेंदु अधिकारी के भाई दिब्येंदु ने एगरा सीट से तृणमूल कांग्रेस के तरुण कुमार मैती को 25,692 वोटों से हरा दिया।
नैना बंदोपाध्याय: टीएमसी नेता और सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की पत्नी नैना ने एक बार फिर चौरंगी सीट से टीएमसी के टिकट पर जीत हासिल की है। उन्होंने भाजपा के संतोष कुमार पाठक को 22,002 वोटों से हराकर चुनाव जीता। वे पहले भी इस सीट से विधायक रह चुकी हैं।
उदयन गुहा: दिग्गज फॉरवर्ड ब्लॉक नेता कमल गुहा के बेटे उदयन गुहा टीएमसी के कद्दावर नेता और मंत्री हैं। हालांकि, उनकी यह उपलब्धियां भी उन्हें दिनहाटा सीट से जीत नहीं दिला पाईं। भाजपा के अजय राय ने उन्हें 17,447 वोटों के अंतर से हरा दिया। यह सीट उदयन के परिवार का पारंपरिक गढ़ भी मानी जाती है।
4. असम
गौरव गोगोई: जोरहाट विधानसभा सीट से असम चुनाव में उतरे गौरव को भाजपा हितेंद्र नाथ गोस्वामी के खिलाफ 23,182 वोटों से हार मिली। हालांकि, गौरव पहले ही कांग्रेस की तरफ से सांसद हैं। वे असम के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय तरुण गोगोई के बेटे हैं। उन्हें असम कांग्रेस के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में भी देखा जा रहा है।
शिवली मोहिलारी: बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (बीपीएफ) के संस्थापक और बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) के मौजूदा प्रमुख हग्रामा मोहिलारी की पत्नी शिवली ने इस बार एनडीए गठबंधन की तरफ से कोकराझार सीट से लड़ते हुए यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीए) के लॉरेंस इस्लारी को 39,633 वोटों से हरा दिया। वे विकास और बोडो पहचान के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही थीं।
देबब्रत सैकिया: कांग्रेस के टिकट पर नजीरा विधानसभा सीट से उतरे देबब्रत सैकिया को नजीरा सीट से भाजपा के मयूर बोरगोहेन ने 46,701 वोटों के बड़े अंतर से परास्त कर दिया। गौरतलब है कि देबब्रत सैकिया असम के पूर्व मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया के बेटे हैं। वे नजीरा से विधायक हैं और इस सीट से अपनी विरासत को सहेजकर अपना गढ़ भी बनाए हुए हैं।
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