आजादी के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहली बार विधानसभा चुनावों में भ्रष्टाचार सबसे बड़े मुद्दे के तौर पर उभरा है। शारदा चिटफंड घोटाले और तृणमूल नेताओं के घूस स्टिंग के सामने आने के बाद अब विपक्षी कांग्रेस-वाम मोर्चा गठजोड़ ने इसे अपना प्रमुख मुद्दा बना लिया है। इसके अलावा वह राज्य में लोकतंत्र की बहाली का मुद्दा भी उठा रही हैं। भाजपा ने भी तृणमूल के खिलाफ हमलावर रुख अख्तियार कर रखा है।
विधानसभा में विपक्ष के नेता सूर्यकांत मिश्र कहते हैं कि राज्य में पहले कभी इतनी भ्रष्ट सरकार सत्ता में नहीं रही है। उनका आरोप है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के नेता बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में डूबे हैं। माकपा नेता कहते हैं कि शारदा घोटाले से नारद स्टिंग तक भ्रष्टाचार ही हमारे लिए इन चुनावों में सबसे बड़ा मुद्दा है। उनके मुताबिक राज्य में लोकतंत्र की बहाली और बढ़ती बेरोजगारी भी अहम मुद्दे हैं, लेकिन राज्य के लोग भ्र्रष्टाचार से आजिज आ चुके हैं।
तृणमूल कांग्रेस विपक्ष के आरोपों को मानने के लिए तैयार नहीं है। पार्टी का आरोप है कि शारदा चिटफंड घोटाला पूर्व वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ था। उसने नारद स्टिंग को भी तृणमूल को बदनाम करने के लिए फर्जी व मनगढ़ंत करार दिया है। तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी का दावा है कि तृणमूल सरकार ने तो चिटफंड घोटालों पर अंकुश लगाने का काम किया है। वह स्टिंग वीडियो को भी फर्जी करार देते हैं।
उनसे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी तृणमूल के देश की सबसे ईमानदार पार्टी होने का दावा कर चुकी हैं, लेकिन विपक्ष की रैलियों, दीवारों पर बने कार्टूनों और पोस्टरों-बैनरों में भ्रष्टाचार के मुद्दे को ही तरजीह दी गई है। हाल में हुए फ्लाईओवर हादसे ने भी विपक्ष के आरोपों को मजबूत किया है।