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कांग्रेस को अधर में छोड़ कहां उड़न छू हो गए हैं राहुल गांधी

Sun, 22 Sep 2019 03:07 PM IST
Nilesh Kumar शशिधर पाठक, अमर उजाला

सार

  • हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की घोषणा
  • झारखंड, बिहार, दिल्ली में भी होने हैं विधानसभा चुनाव
  • सोनिया गांधी हैं अस्वस्थ, प्रियंका उत्तर प्रदेश तक सीमित
  • उप चुनाव की भी तैयारी, कौन करेगा कांग्रेस का प्रचार?
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राहुल गांधी - फोटो : a
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विस्तार
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हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो चुकी है, लेकिन पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कुछ अता पता नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी ने ही कमान संभाल रखा है। सोनिया गांधी जहां पार्टी संगठनात्मक आंतरिक मामले देख रही हैं, वहीं प्रियंका गांधी लगातार केेंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों पर हमला बोल रही है। बड़ा सवाल है, आखिर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कहां उड़न छू हो गए हैं?

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घर से बाहर नहीं आते राहुल गांधी

कांग्रेस पार्टी के एक प्रदेश की प्रभारी का कहना है कि राहुल गांधी घर के बाहर नहीं आ रहे हैं। राहुल गांधी की टीम के एक युवा नेता का कहना है कि राहुल जी के बाहर न आने से हम लोगों का उत्साह ठंडा पड़ गया  है। महाराष्ट्र के एक युवा नेता का कहना है कि राहुल गांधी ने पिछले पांच साल में तमाम युवा कांग्रेस नेताओं को पार्टी में मंच दिया है।

अब हम जैसे तमाम नेताओं को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर आगे कांग्रेस पार्टी कैसे चलेगी? राहुल गांधी की टीम के सदस्य का कहना है कि लोकसभा चुनाव का नतीजा आने के बाद से ही राहुल गांधी ने खुद को समेट लिया है। इसका एक मात्र कारण पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता हैं। पार्टी युवा और वरिष्ठ नेताओं के द्वंद में उंस गई है।

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कौन करेगा कांग्रेस का प्रचार?

यह सवाल युवा कांग्रेस महिला नेता हैं। फायर ब्रांड हैं। नाम न छापने की शर्त पर कहती हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। डॉक्टर ने उन्हें स्वास्थ्य का खास ख्याल रखने की सलाह दी है। इसके कारण वह जनसभा आदि में जाने से बचती रही हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश के अलावा किसी दूसरे राज्य में नहीं जाती। कांग्रेस पार्टी के पास इस समय दूसरा ऐसा कोई बड़ा नेता है, जिसकी नाम पर जनसभा में दस हजार लोग आ सकें।

दूसरे चाहे महाराष्ट्र हो या हरियाणा पार्टी के नेताओं में भारी सिर फुटौव्वल चल रही है। सूत्र का कहना है कि ऐसे में उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि कांग्रेस का प्रचार कौन करेगा? कौन प्रचार को लीड करेगा? कौन नेताओं के साथ तालमेल बनाकर राजनीतिक लड़ाई को आगे बढ़ाएगा। कुल मिलाकर यह कि नेता केंद्रित पार्टी में हमारा नेता कौन होगा, जिसकी सब बात मानेंगे?
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क्या निराशा से बाहर नहीं आ पा रहे हैं राहुल गांधी?

कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व महासचिव का कहना है कि हर तूफान के बाद एक खामोशी होती है। लोकसभा चुनाव-2019 का नतीजा आने के बाद यही चल रहा है। सूत्र का कहना है कि दांव-पेच के बिना कोई राजनीति नहीं होती। हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं है पार्टी की मौजूदा स्थिति का कारण कुछ अपरिपक्व, अति उत्साही सलाहकार नेता हैं।

राहुल गांधी स्पष्टवादी, छल छद्म से पहरे राजनीति करते हैं। वह देश की वर्तमान प्रोपैगैंडा आधारित राजनीति में भरोसा नहीं करते, लेकिन जिस तरह से पार्टी ने पिछले दो साल में निर्णय लिए हैं, यह सब उसका नतीजा है। इसका असर राहुल गांधी के ऊपर भी पड़ा है। वह निराशा से बाहर में अभी समय ले रहे हैं।

राहुल गांधी की टीम के एक सदस्य का कहना है कि राहुल गांधी रणनीतिक रूप से खामोश हैं। क्योंकि विरोधी दल राहुल गांधी को टारगेट करके चल रहे हैं। वह कुछ समय बाद फिर तेजी से सक्रिय होंगे। अभी राहुल गांधी अपना होमवर्क करने में व्यस्त हैं।
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