यह सवाल युवा कांग्रेस महिला नेता हैं। फायर ब्रांड हैं। नाम न छापने की शर्त पर कहती हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। डॉक्टर ने उन्हें स्वास्थ्य का खास ख्याल रखने की सलाह दी है। इसके कारण वह जनसभा आदि में जाने से बचती रही हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश के अलावा किसी दूसरे राज्य में नहीं जाती। कांग्रेस पार्टी के पास इस समय दूसरा ऐसा कोई बड़ा नेता है, जिसकी नाम पर जनसभा में दस हजार लोग आ सकें।
दूसरे चाहे महाराष्ट्र हो या हरियाणा पार्टी के नेताओं में भारी सिर फुटौव्वल चल रही है। सूत्र का कहना है कि ऐसे में उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि कांग्रेस का प्रचार कौन करेगा? कौन प्रचार को लीड करेगा? कौन नेताओं के साथ तालमेल बनाकर राजनीतिक लड़ाई को आगे बढ़ाएगा। कुल मिलाकर यह कि नेता केंद्रित पार्टी में हमारा नेता कौन होगा, जिसकी सब बात मानेंगे?
कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व महासचिव का कहना है कि हर तूफान के बाद एक खामोशी होती है। लोकसभा चुनाव-2019 का नतीजा आने के बाद यही चल रहा है। सूत्र का कहना है कि दांव-पेच के बिना कोई राजनीति नहीं होती। हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं है पार्टी की मौजूदा स्थिति का कारण कुछ अपरिपक्व, अति उत्साही सलाहकार नेता हैं।
राहुल गांधी स्पष्टवादी, छल छद्म से पहरे राजनीति करते हैं। वह देश की वर्तमान प्रोपैगैंडा आधारित राजनीति में भरोसा नहीं करते, लेकिन जिस तरह से पार्टी ने पिछले दो साल में निर्णय लिए हैं, यह सब उसका नतीजा है। इसका असर राहुल गांधी के ऊपर भी पड़ा है। वह निराशा से बाहर में अभी समय ले रहे हैं।
राहुल गांधी की टीम के एक सदस्य का कहना है कि राहुल गांधी रणनीतिक रूप से खामोश हैं। क्योंकि विरोधी दल राहुल गांधी को टारगेट करके चल रहे हैं। वह कुछ समय बाद फिर तेजी से सक्रिय होंगे। अभी राहुल गांधी अपना होमवर्क करने में व्यस्त हैं।