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बढ़ती बेरोजगारी के बावजूद चुनावों में भारी है 'जय श्री राम' का नारा, फरवरी में फिर बढ़ी बेरोजगारों की संख्या

Mon, 01 Mar 2021 07:47 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रीय स्तर पर जनवरी में बेरोजगारी दर कम होने के बाद फरवरी में फिर बढ़ी, शहरों और गांवों दोनों जगहों पर बेरोजगारी दर बढ़कर सात फीसदी तक पहुंची...
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Bengali actor Srabanti Chatterjee joins BJP - फोटो : ANI
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल आर्थिक दृष्टि से कमजोर राज्य है। यहां लोगों की औसत आय कम है और राज्य में भारी संख्या में लोग बेरोजगार भी हैं। इस दृष्टि से यहां विधानसभा चुनाव में बेरोजगारी और विकास प्रमुख मुद्दा होना चाहिए था। लेकिन यही मुद्दा इस चुनाव में सिरे से गायब है। यहां भाजपा ने 'जय श्री राम' के नारे के सहारे सरकार द्वारा एक वर्ग के तुष्टीकरण को मुद्दा बना रखा है, तो ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में सांप्रदायिकता बढ़ने के खतरे को प्रमुखता दे रखी है। यानी यहां सत्ता के दोनों ही प्रमुख दावेदारों ने आम आदमी के रोजी-रोटी के सवाल को पीछे छोड़ रखा है। यह हाल तब है जब राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर फरवरी माह के अंत में बढ़कर सात फीसदी तक पहुंच चुकी है।

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देश में पांच प्रमुख राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इनमें पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हैं। लेकिन मजे की बात है कि इन पांचों ही प्रदेशों में बेरोजगारी प्रमुख मुद्दा नहीं है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी यह मुख्य मुद्दा बनता नहीं दिख रहा है। इसकी बजाय यहां अन्य मुद्दे ज्यादा भारी हैं।

असम में नागरिकता कानून का मुद्दा अभी भी सत्ता पक्ष और विपक्ष को रास आ रहा है, तो तमिलनाडु में भाषा और अगड़ा-पिछड़ा प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। केरल में भाजपा ने मेट्रो मैन श्रीधरन को विकास का प्रतीक भले ही घोषित कर रखा है लेकिन इसके बाद भी उसका हिंदुत्व कार्ड ही यहां ज्यादा कारगर होता दिख रहा है। वहीं वामदलों ने भी भाजपा के हिंदुत्व के विरोध में ही कमर कस रखी है। पुडुचेरी में भाजपा ने पूर्व कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार को मुद्दा बना रखा है। लेकिन इन सभी राज्यों में बेरोजगारी का मुद्दा पश्चिम बंगाल की तरह कहीं पीछे छूटा हुआ है।

कितनी है बेरोजगारी दर

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के ताजा आंकड़ों के अनुसार दिसंबर माह में राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर बढ़कर 9.06 फीसदी तक पहुंच गई थी। जनवरी माह में इसमें तेजी से सुधार दर्ज किया गया था और बेरोजगारी दर घटकर 6.53 फीसदी तक हो गई थी। लेकिन फरवरी माह के अंत में बेरोजगारी दर में एक बार फिर बढ़ोतरी देखी जा रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक इस समय यह सात फीसदी हो गई है। शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में सात फीसदी तक की बेरोजगारी दर्ज की गई है।

चुनावी राज्यों में बेरोजगारी दर

पश्चिम बंगाल में फरवरी माह के अंत में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय स्तर से कुछ ही कम यानी 6.2 फीसदी दर्ज की गई है। तमिलनाडु में बेरोजगारी दर 4.8 और केरल में 4.3 फीसदी पर पहुंच गई है। असम में अपेक्षाकृत यह काफी कम केवल 1.6 फीसदी दर्ज की गई है।

क्या कहती है भाजपा

पांचों चुनावी राज्यों में बेरोजगारी ज्यादा बड़ा मुद्दा क्यों नहीं है? अमर उजाला के इस सवाल पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि रोजगार सभी राज्यों में प्रमुख मुद्दों में शामिल रहता है। लेकिन कभी-कभी दूसरे मु्द्दे जनता के लिए ज्यादा संवेदनशील रहते हैं, लिहाजा राजनीतिक दल उन्हें उठाने की कोशिश जरूर करते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने सभी राज्यों में विकास को अपना प्रमुख मुद्दा बना रखा है। मेट्रो मैन को केरल में प्रमुख चेहरा बनाना पार्टी की इसी सोच का प्रतीक है कि वह विकास को ही प्रमुखता देना चाहती है।

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