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अपने ही नेताओं से कांग्रेस और भाजपा के नेता जी परेशान

Fri, 09 Nov 2018 06:48 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ - फोटो : Twitter Congress @INCIndia
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राजनीति में कोई एक फार्मूला लंबे समय तक नहीं चल पाता। एक दिनी क्रिकेट कही जाने वाली राजनीति में भाजपा और कांग्रेस दोनों के शीर्ष नेता अपने ही नेताओं से परेशान हैं। दोनों ही दलों के नेता अपने विरोधी दलों के नेताओं के लिए परेशानी का सबब बनते तो ठीक था लेकिन मजे की बात ये है कि यह नेता गुटबाजी में अपने ही दलों के नेताओं के लिए परेशानी का सबब बनकर शीर्ष नेतृत्व के पैर के पसीने को सिर पर चढ़ा रहे हैं।

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हालांकि इस गुटबाजी और आपसी खींचतान को रोकने के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्षों ने काफी कोशिश की है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ को लेकर कई प्रयोग किए तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। लेकिन अभी भी स्थिति ढाक के तीन पात ही है।

 कांग्रेस पार्टी की एक सांसद और वरिष्ठ नेता का मानना है कि गुटबाजी ने पार्टी लिए परेशानी खड़ी कर दी है। इसका तीनों राज्यों में करीब एक दर्जन सीटों पर असर पड़ सकता है। भाजपा के नेताओं का भी कहना है कि गुटबाजी के कारण राजस्थान में उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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अमित शाह, वसुंधरा राजे
भारतीय जनता पार्टी
 
भाजपा जिस छत्तीसगढ़ में जीत को लेकर आश्वस्त थी वहां गुटबाजी ने उसके माथे पर पसीना ला दिया है।  राजस्थान में पार्टी उपाध्यक्ष भूपेन्द्र यादव, ओम माथुर, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समेत अन्य में जोरदार ठनी थी। वसुंधरा राजे अपने हिसाब से राजस्थान की सरकार चला रही थी। लेकिन धीरे-धीरे सतह पर आई कलह कम हुई है। अब थोड़ा सुधार दिखने लगा है। वहीं मध्य प्रदेश में जहां सब लगभग ठीक था, वहां उठा-पटक बढ़ रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा कई मंत्रियों में खटपट दिखाई देने लगी है। जबकि तीनों राज्यों का चुनाव भाजपा के लिए नाक का सवाल है।

कांग्रेस

ऐसी ही स्थिति कांग्रेस के लिए भी है। छत्तीसगढ़ में गुटबाजी की आशंका को देखकर कांग्रेस ने ताम्रध्वज साहू को लगाया। पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पूनिया और अन्य ने भी अपनी सक्रियता बढ़ाई। इसी तरह से मध्य प्रदेश और राजस्थान में राहुल गांधी ने सभी शीर्ष नेताओं को केवल अपने राज्य में जनाधार बढ़ाने, वहां विधानसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंप दी।

म.प्र. में कमल नाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के कंधे पर खास तौर से जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन टिकट बंटवारे की बैठक के दौरान दिग्विजय सिंह के साथ सिंधिया का झगड़ा सतह पर आ गया। यही स्थिति राजस्थान में देखने को मिल रही है। सीपी जोशी, गिरजा व्यास, सचिन पायलट, अविनाश पांडे सब की निगाह राजस्थान पर टिकाई गई।

पार्टी महासचिव अशोक गहलोत को भी राजस्थान में मजबूत सरकार की वापसी में प्रयास का जिम्मा सौंपते हुए प्रचार अभियान समिति का प्रमुख बनाया गया, लेकिन बताते हैं राज्य में गुटबाजी की तलवारें अब भी खिंची हुई है। यह स्थिति तब है, जब चुनाव प्रचार अब धीरे-धीरे मतदान की तरफ बढ़ रहा है।
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