पांच राज्यों में चुनावी गहमागहमी के बीच में नेताओं से सवाल-जवाब के दौर भी जारी है। नए नए वादे किए जा रहे हैं और पुराने वादे याद दिलाए जा रहे हैं। इसी माहौल पर पेश है चुनिंदा काव्य पंक्तियां जो हमारी लोकतंत्र की समझ को मजबूत करेंगी। मतदान जरूर करें। साथ ही अपने विवेक का इस्तेमाल भी करें। आपका मतदान आपके आगामी पांच सालों की रूपरेखा तय करेगा।
जिंदा रहे चाहे जान जाए,
वोट उसी को दो जो काम आएं
-अज्ञात
हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
जिस को भी देखना हो कई बार देखना
-निदा फाजली
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मिरा मक्सद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए
-दुष्यंत कुमार