फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

असम राइफल्स की पहलः मातृभाषा दिवस पर बच्चों ने कागज पर उकेरे मन के भाव, दिखा विविधता का सुंदर संगम

विज्ञापन
असम राइफल्स की पहलः मातृभाषा दिवस पर बच्चों ने कागज पर उकेरे मन के भाव - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर मिजोरम के सीमावर्ती कस्बे जोखावथार में बच्चों की रचनात्मकता और भाषाई विविधता का सुंदर संगम देखने को मिला। असम राइफल्स की ओर से शनिवार को बहुभाषी पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम, संस्कृति की झलक और एकता का संदेश रंगों के माध्यम से कागज पर उकेरा।

विज्ञापन


कार्यक्रम में प्रेस्बिटेरियन इंग्लिश स्कूल के 22 विद्यार्थियों ने दो शिक्षकों के मार्गदर्शन में भाग लिया। प्रतियोगिता का उद्देश्य न केवल भाषाई विविधता का उत्सव मनाना था, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व का भाव विकसित करने के लिए प्रेरित करना भी था।

प्रतिभागियों ने हिंदी, मिजो और अंग्रेजी सहित विभिन्न भाषाओं में आकर्षक और विचारोत्तेजक पोस्टर तैयार किए। किसी पोस्टर में 'मातृभाषा हमारी पहचान' का संदेश था, तो किसी में “विविधता में एकता” की भावना को रेखांकित किया गया। रंगों और शब्दों के संयोजन ने यह स्पष्ट किया कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहकर आगे बढ़ना चाहती है।
विज्ञापन


प्रतियोगिता के समापन पर विजेताओं को सम्मानित किया गया और सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार तथा अल्पाहार प्रदान किया गया। बच्चों के चेहरे पर उत्साह और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। शिक्षकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में सृजनात्मकता के साथ-साथ सांस्कृतिक जागरूकता भी बढ़ाते हैं।

असम राइफल्स ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से वह न केवल युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास कर रही है, बल्कि स्थानीय समुदायों के साथ अपने संबंधों को भी सुदृढ़ बना रही है। बल का मानना है कि मातृभाषा किसी भी समाज की आत्मा होती है और उसका संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

सीमावर्ती क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और पहचान का आधार भी है- और जब बच्चे अपनी मातृभाषा को रंगों में ढालते हैं, तो उसमें पूरे समाज का भविष्य झलकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें