भारत की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित अर्धसैनिक बलों में से एक असम राइफल्स ने सोमवार को शिलांग स्थित अपने मुख्यालय में गर्व और श्रद्धा के साथ अपना 190वां स्थापना दिवस मनाया। करीब दो शताब्दियों की समर्पित सेवा, वीरता और देश की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति अडिग प्रतिबद्धता को चिन्हित करता है। इस मौके पर असम राइफल्स के लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा, डीजी असम राइफल्स और बल के सभी रैंक ने शिलांग के युद्ध स्मारक पर उन वीर शहीदों कोश्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने अतीत में सर्वोच्च बलिदान दिया।
डीजी एआर ने बल के सभी रैंकों को संबोधित करते हुए उत्तरी-पूर्व और कश्मीर में उग्रवाद से निपटने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सराहना की। इस दौरान सबकी निगाहें 2023-24 के लिए प्रतिष्ठित डीजीएआर ध्वज पर थीं, जिसे बल के सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वाले यूनिट्स 4 असम राइफल्स को सौंपा गया। इसमें 36असम राइफल्स को दूसरे रनर अप और 3 असम राइफल्स को पहले रनर घोषित किया गया। ये पुरस्कार विभिन्न बटालियनों और यूनिट्स द्वारा क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने में किए गए समर्पण, पेशेवरता और असाधारण योगदान को मान्यता देते हैं।
सीमा से लेकर खेल के मैदान तक गाड़ा झंडा
बल ने 2024-25 के दौरान ऑपरेशनों में अपनी मजबूती को साबित करना जारी रखा है। पिछले वर्ष के दौरान असम राइफल्स की चार बटालियनों को 'चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ यूनिट सिटेशन' और छह बटालियनों को 'जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ यूनिट सिटेशन' प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त, बल के कर्मियों को एक शौर्य चक्र, आठ सेना मेडल, और 400 राष्ट्रपति व गवर्नर मेडल से सम्मानित किया गया। बल ने खेलों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, 2024-25 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर 254 पदक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 21 पदक जीते।
बल ‘उत्तर-पूर्व के लोगों’ के साथ मजबूती से है खड़ा बल अपने उपकरणों के आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें अत्याधुनिक हथियारों, निगरानी और सुरक्षा उपकरणों का अधिग्रहण शामिल है। हर साल के साथ असम राइफल्स उत्तर-पूर्व के लोगों के बीच मजबूती से खड़ा रहता है। जैसे-जैसे यह क्षेत्र विकास और समृद्धि की ओर बढ़ रहा है, बल स्थानीय लोगों में सुरक्षा की भावना बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयासरत है। असम राइफल्स नए चुनौतियों का सामना करने और अपनी भूमिका को ‘उत्तर-पूर्व के प्रहरी’ के रूप में निभाने के लिए निरंतर विकसित हो रहा है।