सुप्रीम कोर्ट ने असम के नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजन्स (एनआरसी) के अंतिम ड्रॉफ्ट में बाहर हुए 40 लाख लोगों को आपत्तियों व दावों के लिए राशन कार्ड सहित अन्य पांच अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने की आपत्ति को दरकिनार कर दिया है। साथ पीठ ने अंतिम ड्रॉफ्ट में बाहर हुए 40 लाख लोगों को आपत्तियों व दावों को जताने की तारीख 25 नवंबर से बढ़ाकर 15 दिसंबर कर दी गई है।
चीफ जस्टिस रंजन गोगई और न्यायमूर्ति रोहिंग्टन नरीमन की पीठ ने साथ ही उन पांच दस्तावेजों के जरिए भी अपना दावा जताने की इजाजत दे दी है, जिसे एनआरसी कोऑर्डिनेटर ने इनकार कर दिया था। पीठ ने एनआरसी कोऑर्डिनेटर से कहा कि हम आपके आइडिया को स्वीकार नहीं कर सकते क्योंकि हम नहीं चाहते कि वाजिब व्यक्ति एनआरसी से बाहर रह जाए और फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वालों को शामिल कर दिया जाए। लिहाजा पीठ ने इन पांचों दस्तावेजों को प्रस्तुत करने की इजाजत दे दी है।
ये दस्तावेज 1951 की एनआरसी, 1966 की मतदाता सूची, 1971 की मतदाता सूची, 1971 तक रिफ्यूजी पंजीकरण प्रमाणपत्र और 1971 से पहले जारी राशन कार्ड हैं। हालांकि पीठ ने साफ किया कि सत्यापन करने के बाद ही इन दस्तावेजों को स्वीकार किया जाएगा। अब तक एनआरसी में शामिल व बाहर करने केलिए 10 दस्तावेजों का ही इस्तेमाल करने की इजाजत थी। ये दस्तावेज वे हैं जो 24 मार्च 1971 की मध्यरात्रि को विभिन्न अथॉरिटी द्वारा जारी किए गए थे।
इसके साथ ही पीठ ने एनआरसी के अंतिम ड्रॉफ्ट में बाहर हुए 40 लाख लोगों को आपत्तियों व दावों केलिए आवेदन दाखिल करने की अवधि 15 दिसंबर तक केलिए बढ़ा दी है। इन दावों केलिए 15 जनवरी से नोटिस जारी किया जाएगा और एक अप्रैल, 2019 से सत्यापन का काम शुरू होगा। मालूम हो कि 30 जुलाई को जारी एनआरसी केअंतिम ड्राफ्ट में 3.29 करोड़ लोगों में से 2.89 करोड़ लोगों को शामिल किया गया था।