असम में पेट्रोलियम कर्मचारियों के शीर्ष निकाय ने कहा कि असम से जा रहे वाहनों पर हमले की खबरों के बाद मेघालय में ईंधन के परिवहन को रोक दिया है। बताया जा रहा है कि इससे मेघालय में ईंधन की काफी किल्लत हो गई है और पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। दूसरी ओर मेघालय के मुख्यमंत्री कोरनाड संगमा ने कहा है कि राज्य में ईंधन की किसी तरह की किल्लत नहीं है। इस बीच, शुक्रवार को कुछ ट्रकों को मेघालय जाने की अनुमति दी गई है। मंगलवार सुबह असम-मेघालय सीमा पर हुई हिंसा में छह लोगों की मौत हो गई थी।
असम पेट्रोलियम मजदूर यूनियन (एपीएमयू) ने आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल समेत सभी पीएसयू तेल विपणन कंपनियों को अलग-अलग पत्र भेज कर टैंकरों में ईंधन नहीं भरे जाने के यूनियन के फैसले के बारे में अवगत कराया। गुवाहाटी स्थित आईओसी के पूर्वोत्तर मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस तरह का पत्र मिलने की पुष्टि की है। हालांकि, नुमलीगढ़ रिफाइनरी के प्रवक्ता ने बताया कि संबंधित अधिकारियों को अब तक पत्र नहीं मिला है।
संगठन ने इस बात पर बल दिया है कि मौजूदा स्थिति में ट्रांसपोर्टरों के साथ-साथ उत्पादों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है। वहीं, मेघालय की राजधानी शिलांग समेत राज्य के कई इलाकों के पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों की भीड़ जमा होने लगी। वाहनों की लगी कतार के कारण कई इलाकों में पूरा ट्रैफिक जाम हो गया।
इस बीच, शुक्रवार को मेघालय के मुख्यमंत्री कोरनाड संगमा ने कहा कि राज्य में पेट्रोल और डीजल की कमी नहीं है। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि वे इसका भंडारण नहीं करें। सरकार पूरी तरह से इस पर नजर बनाए हुए है। मुख्यमंत्री ने कहा, राज्य में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। सरकार द्वारा स्टॉक और आपूर्ति की कमी को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई है। सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे किसी भी आवश्यक सामान की घबराहट में खरीदारी न करें।
इस बीच, शुक्रवार को असम और मेघालय के बीच हुई हिंसा के चार दिन बाद असम ने सामानों से लदे ट्रकों को मेघालय में प्रवेश करने की अनुमति दी। सूत्रों ने बताया कि दोनों राज्यों के बीच हिंसा बढ़ने और तनावपूर्ण स्थिति पैदा होने के बाद, पुलिस ने मेघालय में प्रवेश करने के लिए ट्रकों और यात्री वाहनों की आवाजाही पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया था।