आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का ऐसा नया मॉडल विकसित किया है, जो लंबे समय तक लगातार आने वाले डेटा का कम ऊर्जा खर्च करके विश्लेषण कर सकता है। इसे खास तौर पर उन उपकरणों के लिए उपयोगी माना जा रहा है, जहां बिजली या बैटरी की क्षमता सीमित होती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक ऐसे उपकरणों में सीधे एआई के इस्तेमाल का रास्ता आसान कर सकती है, जिनके लिए हर बार दूर स्थित सर्वर पर निर्भर रहना जरूरी नहीं होगा।
कम ऊर्जा में लंबे डेटा का विश्लेषण
बैटरी से चलने वाले उपकरणों के लिए उपयोगी
महत्वपूर्ण बदलाव होने पर ही सक्रिय होने की क्षमता
17 मानक आंकड़ा समूहों पर परीक्षण
स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यावरण और स्वचालित प्रणालियों में उपयोग की संभावना
असम के स्कूलों में एआई और तकनीक की पढ़ाई, छह संस्थाओं से समझौते
असम सरकार ने स्कूल शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए छह संस्थाओं के साथ समझौता किया है। समग्र शिक्षा, असम की इस पहल का उद्देश्य छात्रों की पढ़ाई का स्तर सुधारने के साथ शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल कौशल से लैस करना है।
समझौते के तहत गूगल एआई शिक्षकों को एआई आधारित शैक्षणिक उपकरण और प्रशिक्षण देगा। आईआईटी मद्रास-बोधन एआई मई 2027 तक कक्षा छह से 12वीं तक पढ़ाने वाले करीब एक लाख शिक्षकों को एआई का प्रशिक्षण देने की योजना पर काम करेगा।
वाधवानी एआई छात्रों की पढ़ने की क्षमता का तकनीक के जरिये आकलन करेगा, जिससे बुनियादी साक्षरता मजबूत की जा सके। एजुकेट गर्ल्स स्कूल से बाहर रहने वाले किशोरों, खासकर लड़कियों की पहचान, नामांकन और पढ़ाई जारी रखने में मदद करेगा।
एकस्टेप-एएक्सएल बुनियादी पढ़ाई और गणित के लिए व्यक्तिगत सीखने की सुविधा विकसित करेगा। वहीं, कैनवा एजुकेशन शिक्षकों और छात्रों में डिजिटल साक्षरता, रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता बढ़ाने पर काम करेगा। शिक्षा मंत्री रनोज पेगू ने कहा कि इन साझेदारियों से असम में शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी और तकनीक आधारित बनाने में मदद मिलेगी।