फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Assam: असम सरकार ने हूलॉक गिब्बन आवास के पास तेल खोज की अनुमति दी, विचार के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेजा

Fri, 30 Aug 2024 04:50 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

वन मंत्री चंद्र मोहन पटोवारी ने कहा कि राज्य वन्यजीव बोर्ड (एसबीडब्ल्यूएल) ने अभयारण्य से लगभग 13 किमी दूर तेल की खोज की संभावना की जांच करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कहा, 'हमने इसे राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) को भेज दिया है और वे अंतिम निर्णय लेंगे। अंतिम मंजूरी से पहले, हम विशेषज्ञों के साथ चर्चा करेंगे।'
विज्ञापन
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

असम सरकार ने बृहस्पतिवार को वेदांता समूह की हुल्लोंगापार गिब्बन वन्यजीव अभयारण्य के पास एक तेल अन्वेषण परियोजना को मंजूरी दे दी है। सरकार ने कहा कि प्रस्ताव को विचार के लिए केंद्र के पास भेज दिया गया है। हालांकि, अंतिम मंजूरी से पहले सरकार विशेषज्ञों के साथ चर्चा करेगी। 

विज्ञापन


विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, वन मंत्री चंद्र मोहन पटोवारी ने कहा कि राज्य वन्यजीव बोर्ड (एसबीडब्ल्यूएल) ने अभयारण्य से लगभग 13 किमी दूर तेल की खोज की संभावना की जांच करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कहा, 'हमने इसे राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) को भेज दिया है और वे अंतिम निर्णय लेंगे। अंतिम मंजूरी से पहले, हम विशेषज्ञों के साथ चर्चा करेंगे।'

वहीं, सैकिया ने सरकार के फैसले की आलोचना की और कहा कि पर्यावरणविदों ने जंगल और उसके आसपास तेल खोज की अनुमति देने के विचार का विरोध किया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने पूछा, 'इससे पहले, एनजीटी ने असम सरकार से तत्कालीन पीसीसीएफ एमके यादव के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था, जिन्होंने कमांडो बटालियन के निर्माण के लिए वन भूमि के डायवर्जन की अनुमति दी थी। असम सरकार ने एनजीटी से माफी मांगी। क्या असम सरकार वन कानूनों का उल्लंघन करेगी और वनों को नष्ट कर देगी हर बार जंगल, और फिर माफी मांग लेते हो?'
विज्ञापन


बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 9 अगस्त को वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 का उल्लंघन करने पर आश्चर्य व्यक्त किया था, क्योंकि असम पुलिस की कमांडो बटालियन के निर्माण के लिए गेलेकी रिजर्व फॉरेस्ट के अंदर भूमि के डायवर्जन की अनुमति दी गई थी। न्यायालय ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ एंड सीसी) से पूछा कि यादव के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, जिन्होंने 800 कर्मियों के आवास के लिए ठोस निर्माण करने के लिए वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के उल्लंघन में वन भूमि के डायवर्जन की अनुमति दी थी। 

जोरहाट जिले में 20.98 वर्ग किमी का हुल्लोंगापार गिब्बन अभयारण्य भारत के एकमात्र वानर-हूलॉक गिब्बन का घर है। इसमें पूर्वोत्तर का एकमात्र रात्रिचर प्राणी-बंगाल स्लो लोरिस भी रहता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें