असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि पर आई एडीआर की रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। चुनावी मैदान में उतरे सैकड़ों उम्मीदवारों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं और जिनकी संपत्ति करोड़ों में है। इससे चुनाव में धनबल और बाहुबल के बढ़ते असर को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खैर, ये सवाल तो हर बार खड़े होते हैं। आइए, इस रिपोर्ट पर विस्तार से जानते हैं।
| क्रमांक | पार्टी का नाम | आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवार | प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| 1 | एआईयूडीएफ | 11 उम्मीदवार | 37% |
| 2 | कांग्रेस | 28 उम्मीदवार | 28% |
| 3 | असम गण परिषद (एजीपी) | छह उम्मीदवार | 23% |
| 4 | असम जातीय परिषद (एजेपी) | दो उम्मीदवार | 20% |
| 5 | भाजपा | आठ उम्मीदवार | 9% |
गंभीर आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवार भी चुनाव में?
रिपोर्ट बताती है कि 11 प्रतिशत उम्मीदवारों पर हत्या, हत्या की कोशिश और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। 8 उम्मीदवारों पर हत्या और 9 पर हत्या की कोशिश के मामले हैं। दो उम्मीदवारों पर महिलाओं से जुड़े अपराध के केस हैं। यह स्थिति चुनाव की साफ-सफाई पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
किस पार्टी के पास कितने करोड़पति उम्मीदवार
आंकड़ों के मुताबिक 722 में से 285 उम्मीदवार यानी 39 प्रतिशत करोड़पति हैं। 2021 में यह आंकड़ा 28 प्रतिशत था। भाजपा के 88 प्रतिशत, कांग्रेस के 61 प्रतिशत और अन्य दलों के भी बड़ी संख्या में उम्मीदवार करोड़पति हैं। इससे साफ होता है कि चुनाव में पैसा बड़ी भूमिका निभा रहा है।
| क्रमांक | पार्टी का नाम | कुल उम्मीदवार | करोड़पति उम्मीदवार | प्रतिशत |
|---|---|---|---|---|
| 1 | भाजपा | 90 | 79 | 88% |
| 2 | कांग्रेस | 99 | 60 | 61% |
| 3 | एआईयूडीएफ (एआईयूडीएफ) | 30 | 16 | 53% |
| 4 | असम गण परिषद (एजीपी) | 26 | 18 | 69% |
| 5 | यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) | 18 | 10 | 56% |
| 6 | राइजोर दल | 13 | 6 | 46% |
| 7 | बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) | 11 | 9 | 82% |
| 8 | असम जातीय परिषद (एजेपी) | 10 | 7 | 70% |
| 9 | सीपीआई(एम) | 2 | 2 | 100% |
| 10 | सीपीआई(एमएल)(एल) | 3 | 1 | 33% |
ये पांच उम्मीदवार सबसे ज्यादा धनवान
रिपोर्ट के अनुसार राहुल रॉय सबसे अमीर उम्मीदवार हैं, जिनकी कुल संपत्ति 261 करोड़ रुपये से ज्यादा है। दूसरे नंबर पर मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल हैं, जिनकी संपत्ति 226 करोड़ रुपये से अधिक है। तीसरे नंबर पर जयंता खौंड हैं, जिनकी संपत्ति करीब 67 करोड़ रुपये है। वहीं कुछ उम्मीदवार ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति शून्य या बहुत कम बताई है।
| क्रमांक | उम्मीदवार का नाम | पार्टी का नाम | कुल घोषित संपत्ति |
|---|---|---|---|
| 1 | राहुल रॉय | कांग्रेस | ₹261 करोड़+ |
| 2 | मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल | ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट | ₹226 करोड़+ |
| 3 | जयंता खौंड | कांग्रेस | ₹67 करोड़+ |
| 4 | हिमंत बिस्वा सरमा | भाजपा | ₹35 करोड़+ |
| 5 | नंदिगिरी भूयान | निर्दलीय | ₹47 करोड़+ |
क्या उम्मीदवारों की संपत्ति तेजी से बढ़ रही है?
रिपोर्ट में बताया गया कि दोबारा चुनाव लड़ रहे विधायकों की संपत्ति में पिछले पांच साल में 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। 2021 में इनकी औसत संपत्ति 4.17 करोड़ रुपये थी, जो 2026 में बढ़कर 7.52 करोड़ रुपये हो गई है। यह तेजी से बढ़ती संपत्ति भी सवाल खड़े करती है।
क्या शिक्षा और उम्र के आंकड़े भी कुछ बताते हैं?
करीब 53 प्रतिशत उम्मीदवार ग्रेजुएट या उससे ज्यादा पढ़े-लिखे हैं, जबकि 45 प्रतिशत की पढ़ाई 5वीं से 12वीं तक है। उम्र के लिहाज से 60 प्रतिशत उम्मीदवार 41 से 60 साल के बीच हैं। महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 8 प्रतिशत है, जो काफी कम मानी जा रही है।
| क्रमांक | शिक्षा का स्तर | उम्मीदवारों की संख्या | प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| 1 | 5वीं से 12वीं तक | 323 | 45% |
| 2 | ग्रेजुएट और उससे ऊपर | 384 | 53% |
| 3 | डिप्लोमा धारक | 12 | लगभग 2% |
| 4 | सिर्फ साक्षर | 3 | बहुत कम (0% के आसपास |
महिलाओं की कितनी भागीदारी
असम विधानसभा चुनाव 2026 में महिलाओं की भागीदारी अभी भी सीमित नजर आती है। कुल 722 उम्मीदवारों में सिर्फ 60 महिलाएं हैं, यानी लगभग 8 प्रतिशत। यह आंकड़ा 2021 के बराबर ही है, जिससे साफ है कि महिला प्रतिनिधित्व में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट तौर पर नहीं बताया गया है कि किस पार्टी ने कितनी महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। ऐसे में पार्टीवार महिला उम्मीदवारों का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। कुल मिलाकर, सभी दलों में महिलाओं की हिस्सेदारी कम बनी हुई है, जो राजनीति में लैंगिक संतुलन की चुनौती को दिखाता है।
| क्रमांक | श्रेणी | संख्या | प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| 1 | कुल उम्मीदवार | 722 | 100% |
| 2 | महिला उम्मीदवार | 60 | 8% |
| 3 | पुरुष उम्मीदवार | 662 | 92% |
क्या सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का असर नहीं दिख रहा?
रिपोर्ट में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद राजनीतिक दल आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट दे रहे हैं। कोर्ट ने ऐसे उम्मीदवारों को चुनने के कारण बताने को कहा था, लेकिन दल अब भी पुराने तरीके पर चल रहे हैं। इससे चुनाव सुधार की दिशा में गंभीर कमी नजर आती है।
रिपोर्ट में दिए गए कई अहम सुक्षाव
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि गंभीर अपराधों में दोषी लोगों को चुनाव लड़ने से रोका जाए और राजनीतिक दलों को जवाबदेह बनाया जाए। साथ ही मतदाताओं को भी जागरूक करने की जरूरत बताई गई है। साफ है कि चुनाव में धन और बाहुबल का असर लोकतंत्र के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।